विदेशी फंडों पर कर की कितनी देनदारी?

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने पूंजी लाभ मद में विदेशी फंड से जो कर की मांग की है, क्या वह जरूरत से ज्यादा है? वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा के शुक्रवार के जवाब के मुताबिक ऐसा ही लगता है।

लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में मंत्री ने कहा, “आय कर अधिनियम-1961 की धारा 115जेबी के न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) प्रावधान के तहत कमाए गए लाभ पर कर देने के लिए विदेशी फंड के 68 मामलों में कर नोटिस भेजा गया है।”

सिन्हा ने कहा, “अब तक कुल 608 करोड़ रुपये कर की मांग की गई है।” उन्होंने कहा कि यह कानूनी मसला है और उसी के मुताबिक प्रावधान अपनाए जा रहे हैं।

पिछले कुछ सप्ताहों से करीब 50-150 विदेशी फंड से कुल 40 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित कर मांग बताई जा रही है। सभी हितधारकों और विदेशी निवेशकों ने यह मुद्दा वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष उठाया है।

सीबीडीटी ने शुक्रवार को प्रधान आय कर मुख्य आयुक्तों से कहा कि जिन मामलों में विदेशी फंड ने अन्य देशों के साथ हुए समझौते का हवाला देते हुए कर छूट का दावा किया है, उन्हें तेजी से निपटाया जाए।

परामर्श कंपनी डिलॉयट हास्किंस एंड सेल्स के साझेदार सुनील शाह ने घटनाक्रम पर टिप्पणी में कहा एमएटी के तहत कुछ विदेशी फंड पर कर मांग से संबंधित हाल की चर्चा और पुराने मामलों को खोले जाने के संबंध में सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “अन्यथा अदालत को इस मुद्दे को सुलझाना होगा।”

सीबीडीटी के परिपत्र का हवाला देते हुए शाह ने कहा, “यह स्वागत योग्य कदम है। इससे कुछ श्रेणियों के विदेशी फंड के लिए अनिश्चतता कम होगी। जिन फंड के साथ समझौते की सुरक्षा उपलब्ध नहीं है, उनके लिए यह विवाद तब तक चलता रहेगा, जब तक कि इसे सरकार न सुलझाए या अदालत न सुलझाए।”

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