नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। देश के विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार वित्त वर्ष 2016-17 की जून में खत्म हो रही पहली तिमाही में सुस्त रहने की संभावना है। इसका कारण निर्यात में कमी, मांग में कमी और उच्च ऋण दर को बताया गया है।
उद्योग मंडल, फिक्की ने अपने ताजा सर्वेक्षण के आधार पर रविवार को यह जानकारी दी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने अपने पिछले सर्वेक्षण के बारे में कहा, “पहले के सर्वेक्षण में 2015-16 की चौथी तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में तेजी के बाद 2016-17 की पहली तिमाही में तेजी की संभावना जताई गई थी। लेकिन अब इसकी उम्मीद नहीं है।”
वर्तमान सर्वेक्षण के बारे में इसमें कहा गया, “वित्त वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार घटने के बारे 53 फीसदी प्रतिभागियों ने संभावना जताई है, जबकि यह 2015-16 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 60 फीसदी प्रतिभागियों द्वारा आंकी गई संभावना थी। वहीं, 2015-16 की तीसरी तिमाही में यह 55 फीसदी थी।”
इसमें आगे कहा गया है, “निर्यात में कमी, मांग में कमी और उच्च ऋण दर के कारण विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार सुस्त रहने की संभावना है।”
वहीं, 38 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि अप्रैल-जून के महीने में उन्हें अधिक ठेके मिले हैं, जबकि 44 फीसदी का कहना था कि ठेके की संख्या पिछले साल की समान अवधि जितनी ही है।
फिक्की ने बताया कि 80 फीसदी से ज्यादा प्रतिभागियों का कहना था कि इस तिमाही में वे कोई नई भर्तियां नहीं करने जा रहे हैं।
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