यवतमाल, 10 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में यहां सैकड़ों किसानों ने विवादित टिप्पणी के विरोध में महाराष्ट्र के कृषि मंत्री एकनाथ खड़से का पुतला फूंका और पोस्टर जलाया। खड़से ने कहा था कि जनजाति समुदाय के किसान आत्महत्या नहीं करते, क्योंकि वे जानते हैं कि जीवन में संघर्ष कैसे किया जाता है और किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए कोई हल नहीं है।
एक कार्यकर्ता ने कहा कि महिलाओं सहित किसानों ने विवादित टिप्पणी देने के लिए खड़से के खिलाफ नारे लगाए।
विदर्भ जन आंदोलन समिति (वीजेएएस) के प्रमुख किशोर तिवारी ने आईएएनएस से कहा, “किसान चाहते हैं कि वे अपनी टिप्पणी को स्पष्ट करें कि क्या खुदकुशी करने वाले अन्य गैर जनजाति किसान अनैतिक थे या नहीं।”
उन्होंने कहा कि विदर्भ तथा राज्य के अन्य हिस्सों में इस गंभीर मुद्दे पर सरकार की निष्ठुरता के प्रति व्यापक रोष है जो सूखा, बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्ठि से जूझता रहा है।
उन्होंने कहा, “इन परिस्थितयों में मंत्री की टिप्पणी असंवेदनशील तथा निंदनीय है। यह वही भारती जनता पार्टी (भाजपा) है, जिसने विधानसभा चुनाव से पहले वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह कृषि संकट को दूर करेगी।”
उन्होंने कहा कि बीते लगभग दो दशकों में दर्जनों समिति, आयोग तथा विशेषज्ञ पैनल ने कृषि संकट को लेकर रपट सौंपे हैं और अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इजरायली विशेषज्ञ को आमंत्रित किया है, लेकिन फिर भी खड़से को लगता है कि समस्या का कोई समाधान नहीं है।
वीजेएएस ने केवल साल 2015 में आत्महत्या करने वाले जनजाति समुदाय के कई लोगों के नाम गिनाए और मंत्री खड़से को चुनौती दी कि वे जाकर खुद इसकी पुष्टि कर लें।
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