वृंदावन : पुजारी व एनजीओ में विवाद, मंदिर का काम ठप

वृंदावन, 5 मई (आईएएनएस)। भगवान श्रीकृष्ण और राधा की रासनगरी वृंदावन स्थित चार ‘लीला स्थली’ में से एक सेवा कुंज की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

वृंदावन, 5 मई (आईएएनएस)। भगवान श्रीकृष्ण और राधा की रासनगरी वृंदावन स्थित चार ‘लीला स्थली’ में से एक सेवा कुंज की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

स्थानीय पुजारियों ने एक गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) पर पुननिर्माण के बहाने मंदिर की पवित्रता और मूल संरचना से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है, जिससे दोनों पक्षों में ठन गई है। इधर, एनजीओ ने पुजारियों पर अपना हित साधने का आरोप लगाया है।

सेवा कुंज समिति की अध्यक्ष राधा कुमुद ने आईएएनएस को बताया, “मंदिर के तथाकथित सौंदर्यीकरण के तहत इसकी मूल संरचना और माहौल को भंग करने को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है। यह वृंदावन के लोकप्रिय दर्शनीय स्थलों में से एक है। हमने बीते सप्ताह न्यायालय में अर्जी दी थी, जिसके बाद स्थगन आदेश लगा दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 मई को है।”

करीब दो सप्ताह पहले मंदिर के गोस्वामी (पुजारियों) ने मंदिर के पुनर्निमाण और सौंदर्यीकरण को लेकर गैर सरकारी संगठन ब्रज फाउंडेशन की तीखी आलोचना की थी।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक यहां एक सरोवर और वृक्षवाटिका का शिलान्यास करने वाले थे, लेकिन विरोध को देखते हुए उन्हें कार्यक्रम बदलना पड़ा।

ब्रज फाउंडेशन के प्रवक्ता गौरव गोला ने आईएएनएस को बताया, “कुछ लोग जानबूझकर बिना मतलब डर और संशय फैला रहे हैं। हमने पवित्र मंदिर का पुनर्निमाण कर इसके गौरव को वापस लाने की कोशिश की है, लेकिन कुछ लोग स्वार्थसिद्ध के लिए इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, मंदिर की मरम्मत और सौंदर्यीकरण में इसके हरित आवरण से छेड़छाड़ नहीं की गई है, न ही किसी वृक्ष को काटा गया है।

मंदिर के पुनर्निमाण का काम 2011 में शुरू हुआ था। ऐसी मान्यता है कि कृष्ण और राधा सेवा कुंज में रात को मिलते थे और गोपियों संग रासलीला करते थे। इसी को ध्यान में रखते हुए शाम की पूजा-आरती के बाद मंदिर को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है और रात्रि के समय मंदिर में प्रवेश की मनाही रहती है।

वृंदावन के बीचोबीच स्थित सेवा कुंज की खोज स्वामी हित हरिवंश ने 1590 में की थी, जिसके बाद इसे तीर्थस्थल बना दिया गया और हर रोज यहां नियम से पूजा आरती की जाती है।

हालांकि आगरा के लोक अधिकारियों की उदासीनता और उपेक्षा के कारण सेवा कुंज और वृक्षवाटिका कचरे के ढेर में तब्दील होता जा रहा था, पानी के अभाव में हरित आवरण सूखता जा रहा था और चारदीवारी भी जगह-जगह से ढह गई है।

एक स्थानीय पुजारी गिरधारी लाल ने आईएएनएस को बताया, “सेवा कुंज और आसपास के इलाके की साज-सज्जा और पुनर्निमाण का काम शुरू होने से पहले पवित्र वृक्ष वाटिका रख रखाव के अभाव में उजाड़ हो चली थी और यहां आने वाले पर्यटकों को बंदरों के उत्पात का शिकार होना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति में सुधार आया है और बंदरों का उत्पात भी नियंत्रण में है।”

एक तरफ जहां एनजीओं द्वारा सेवा कुंज के पुनर्निमाण और सौंदर्यीकरण को तीर्थयात्रियों और पर्यटकों द्वारा सराहा जा रहा है, वहीं मंदिर के जुड़ें पुजारियों के एक समूह ‘सेवायात’ इसका विरोध कर रहा है।

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