व्यापमं से सिर्फ 1338 अभ्यर्थियों के चयन में गड़बड़ी : शिवराज

cmभोपाल- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को यहां स्वीकार किया कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित चयन परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है, लेकिन सिर्फ 1,338 अभ्यर्थियों के चयन में। जबकि व्यापमं द्वारा आयोजित परीक्षाओं में 3,54,000 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। राजधानी भोपाल में रविवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के बच्चों के सम्मान के लिए आयोजित समारोह में चौहान ने यह बताने की कोशिश की कि गड़बड़ी का प्रतिशत बहुत कम है, मगर राज्य को बदनाम किया जा रहा है, उनकी सरकार ऐसा होने नहीं देगी।

चौहान ने कहा, “राज्य में पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में चयन और परीक्षा की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। नियुक्तियों में गड़बड़ी होती थी। उनकी सरकार ने इसे रोकने के लिए व्यापमं से परीक्षाएं कराई। अब तक एक करोड़ से ज्यादा बच्चों ने अलग-अलग परीक्षाएं दी हैं। कई बच्चे दो-दो परीक्षाओं में शामिल हुए हैं। इन परीक्षाओं से 3,54,000 लोगों का चयन हुआ है, जिनमें से सिर्फ 1338 के चयन में गड़बड़ी पाई गई। यह परीक्षार्थियों की संख्या के 0़ 01 प्रतिशत से भी कम है।”

चौहान ने बच्चों से कहा कि 1,338 गड़बड़ियों के कारण राज्य को इस तरह बदनाम किया जा रहा है जैसे सबकुछ गड़बड़ हो गया हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य का नाम किसी भी कीमत पर बदनाम नहीं होने दिया जाएगा, अगर किसी ने गड़बड़ की है तो वह सजा पाएगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य में पीएमटी तथा कई अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परीक्षा और नौकरियों की भर्ती परीक्षाएं आयोजित करने का जिम्मा व्यापमं के पास है।

व्यापमं घोटाले का खुलासा जुलाई 2013 में हुआ। अगस्त 2013 में मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई। उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच की निगरानी के लिए अप्रैल 2014 में एसआईटी गठित की गई।

एसटीएफ ने कुल 55 प्रकरण दर्ज किए थे, 2100 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, वहीं 491 आरोपी अब भी फरार है। जांच के दौरान 48 लोगों की मौत हो चुकी है।

इस बीच सर्वोच्च न्यायालय ने जांच का जिम्मा नौ जुलाई, 2015 को सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई अबतक 12 प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है। इसके अलावा उसने 14 मौतों को भी जांच के दायरे में ले लिया है।

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