तिरुवनंतपुरम, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की अध्यक्षता में मंगलवार सुबह यहां हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में आबकारी आयुक्त ऋषि राज सिंह को सर्वोच्च न्यायालय में इस संबंध में एक याचिका दायर करने के लिए कहा गया है।
सरकार ने राजमार्गो के किनारे स्थित शराब की दुकानों पर प्रतिबंध लगाए जाने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ द्वारा प्रतिबंध का समर्थन करने के बाद राज्य सरकार ने फिर से शीर्ष अदालत की शरण में जाने का फैसला किया।
याचिका में अदालत से तीन महीने का समय मांगा जाएगा, ताकि राज्य में राजमार्गो के किनारे स्थित 850 शराब की दुकानों में से सरकार के स्वामित्व वाली 207 दुकानों को हटाया जा सके।
शीर्ष अदालत ने दिसंबर, 2016 में राष्ट्रीय राजमार्गो और राज्य राजमार्गो के किनारे 500 मीटर के दायरे में स्थित शराब की दुकानें बंद करने का आदेश दिया है, जिसका पालन करते हुए एक अप्रैल से सारी दुकानें बंद कर दी गई हैं।
राज्य के आबकारी मंत्री जी. सुधाकरन ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, “हमारा स्पष्ट मानना है कि शराब अच्छी चीज नहीं है, लेकिन केरल में ऐसे लोग हैं जो इसका सेवन करते हैं। अगर उन्हें शराब नहीं मिली तो वे मजबूरी में अन्य मादक पदार्थो का सेवन करने लगेंगे, जिससे उनकी मौत भी हो सकती है।”
सुधाकरन ने कहा, “हम इस वास्तविकता से वाकिफ हैं और इसी को ध्यान में रखकर सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर करेंगे और शराब की दुकानें स्थानांतरित करने के लिए तीन महीने का समय मांगेंगे।”
पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने पत्रकारों से कहा कि राज्य की वामपंथी सरकार विचित्र स्थिति में फंस गई है।
कांग्रेस नेता चांडी ने कहा कि यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है, क्योंकि मौजूदा सरकार पिछली सरकार के हर काम का विरोध करती है।
चांडी ने कहा, “हमारी नीति उदयभानु आयोग की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसका गठन के. करुणाकरण ने किया था। तब ए. के. एंटनी ने शराब पर प्रतिबंध लगाया था। अपने कार्यकाल के दौरान 2005 में मैंने 10 वर्ष के अंतराल के दौरान चरणबद्ध तरीके से राजमार्गो को शराब की दुकानों से मुक्त करने का फैसला किया था।”
उन्होंने आगे कहा, “तब विपक्ष में रहे वामदल ने यूडीएफ के शराबबंदी के फैसले का जमकर विरोध किया था और कुछ ऐसा बरताव किया था जैसे उनके पास कोई विशेष गुप्त योजना है।”
राज्य के वित्तमंत्री थॉमस इसाक मानते हैं कि शराबबंदी के इस फैसले से राज्य को प्रतिदिन 10 करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा होगा।
नया वित्त वर्ष शुरू होने के बाद राज्य में 1,749 शराब की दुकानें कारोबार नहीं कर पा रहीं।
इसाक ने कहा, “राजस्व को होने वाले घाटे को देखते हुए चीजें कठिन लग रही हैं और हमें इस घाटे की पूर्ति के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने होंगे।”
ताजा अनुमान के मुताबिक, नया आदेश आने के बाद राज्य में 24,000 कामगारों को नौकरियां गंवानी पड़ी हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 लोगों का काम बंद हो गया है।
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