शवों की पहचान में अब तेजी लाएगी दिल्ली पुलिस

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस जल्द ही एक ऑनलाइन एप पेश करेगी, जिसे सेल फोन में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एप हर साल मिलने वाले हजारों शवों की पहचान प्रक्रिया में तेजी लाएगा। फिलहाल शवों की पहचान में 15 से 60 दिन का समय लगता है। दिल्ली में बड़ी संख्या में मिलने वाले ऐसे शवों की पहचान दिल्ली पुलिस के 80 हजार कर्मियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण काम है। दिल्ली पुलिस पर देश की राजधानी के 1.7 करोड़ निवासियों की सेवा की जिम्मेदारी है।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस जल्द ही एक ऑनलाइन एप पेश करेगी, जिसे सेल फोन में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एप हर साल मिलने वाले हजारों शवों की पहचान प्रक्रिया में तेजी लाएगा। फिलहाल शवों की पहचान में 15 से 60 दिन का समय लगता है। दिल्ली में बड़ी संख्या में मिलने वाले ऐसे शवों की पहचान दिल्ली पुलिस के 80 हजार कर्मियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण काम है। दिल्ली पुलिस पर देश की राजधानी के 1.7 करोड़ निवासियों की सेवा की जिम्मेदारी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पासवर्ड से रक्षित इस एप का नाम यूआईडीबी या अनआईडेंटिफाइड डेड बॉडीज है। यह ऐसे शवों के परिवार वालों को सूचित करने के समय में कमी लाएगा और ऐसे मामलों जिनमें खासकर कुछ गलत किया गया होगा तो उन्हें सुलझाने में भी मददगार होगा।

मौजूदा समय में जिन शवों की पहचान नहीं हुई रहती है, उनके मामले में यदि पुलिस को प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि कुछ गलत नहीं हुआ है, तो बरामदगी के 72 घंटे के अंदर उसके धर्म के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। अन्यथा पुलिस सामान्यतया ऐसे शवों का विद्युत शवदाह करती है।

बहुत सारे मामलों में परिवारवालों को मौत का पता तब चलता है, जब उसकी अंतिम क्रिया कर दी जाती है। लेकिन नई विकसित प्रणाली से उन्हें सूचित करने में कम समय लगेगा, ऐसी उम्मीद है।

जब यह प्रणाली पूरी तरह काम करने लगेगी तो जांच अधिकारी शव की तस्वीर और अनुमानित उम्र, पहचान का कोई निशान, लंबाई, चमड़े का रंग और उसके कपड़े का ब्योरा अपने सेलफोन के जरिए एप पर अपलोड कर देगा।

ये तस्वीरें और अन्य ब्योरा संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को नजर आएगा और वे अपने सेलफोन पर जल्द से संदेश जारी कर देंगे।

इस सॉफ्टवेयर को बनाने वाली टीम से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि उसके बाद संबंधित थाने के थानेदार, सहायक पुलिस आयुक्त और पुलिस उपायुक्त अपने डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए दस्तावेज के सत्यापन की पुष्टि करेंगे। ये सभी काम उसी समय(रियल टाइम) किए जाएंगे।

सत्यापित दस्तावेज जनसंपर्क कार्यालय शाखा भेजा जाएगा, जो बगैर पहचान वाले शव का ब्योरा 12 घंटे के अंदर अखबारों में प्रकाशन के लिए भेजेगा। पहले मामले की जटिलता को देखते हुए इन सारी प्रक्रिया में एक या दो हफ्ते लग जाते थे।

दिल्ली पुलिस ने इस साल जनवरी से 24 अप्रैल तक दिल्ली में 908 अज्ञात शव बरामद किए हैं। पिछले साल ऐसे शवों की संख्या 3,278 थी, जबकि वर्ष 2014 में 3300 से अधिक ऐसे शव बरामद हुए थे।

ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली दिल्ली पुलिस के नवनियुक्त प्रमुख आलोक कुमार वर्मा का अपना विचार है। अधिकारी ने कहा कि यह अंतिम चरण में है और इसका शुभारंभ जल्द ही किया जाएगा।

अन्य शाखाओं में दिल्ली पुलिस का रेलवे विभाग इस नई सत्यापन प्रणाली को अपनाने वाला पहला विभाग होगा।

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