उन्होंने तीन साल का हिसाब देने के लिए वक्फों को ज्यादा समय देने और वक्फ संपत्तियांे का सर्वे दोबारा किसी न्यायाधीश से कराने की मांग की है।
सपा मुखिया को लिखे अपने पत्र में मौलाना ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड की ओर से दो चार अखबारों में यह खबर दी गई है कि जिन वक्फ की आय एक लाख रुपये सालाना है, वह एक सप्ताह के भीतर अपने तीन साल का हिसाब प्रस्तुत करें, ताकि उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जा सके।
मौलाना जव्वाद ने कहा कि प्रदेशभर के गांवों गांवों तक वक्फ फैले हुए हैं, जहां तक अखबार भी नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में उन तक यह सूचना कैसे पहुंच सकती है। दूसरे वक्फों को तीन साल का हिसाब पेश करने के लिए समय कम दिया गया है।
उन्होंने तीसरी समस्या गिनाते हुए लिखा कि कई बड़े वक्फ ऐसे भी हैं जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक है लेकिन मतुव्वल्लयों, बोर्ड के कर्मचारियों और कुछ बोर्ड के बेर्मान सदस्यों की मिलीभगत से आय कम दिखाई जाती है और आपस में हिस्से बांट लिए जाते हैं। उसका साक्ष्य देते हुए उन्होंने कहा कि उनके मुहल्ले में स्थित वक्फ मीर बाकर सौदागर है, जिसकी लगभग 50 दुकानें और मकान हैं और 45 बीघा जमीन कानपुर रोड पर है मगर आय कुल तीन हजार रुपये जताई जाती है।
मौलाना ने पत्र में लिखा कि इन कारणों और भ्रष्टाचार को देखते हुए शिया वक्फ बोर्ड की संपत्ति का निष्पक्ष सर्वेक्षण किसी बड़े ईमानदार अधिकारी या न्यायाधीश से कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वक्फ बोर्ड द्वारा अखबारों में आई खबर को धोखा करार दिया।
उन्होंने ने लिखा कि वह कई सालों से इस सर्वेक्षण की मांग कर रहा हों, मगर उसे अनसुना किया जा रहा है। मौलाना जल्द ही इस संबंध में मुलायम सिंह यादव से मुलाकात करेंगे।
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