भोपाल, 27 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के श्यामला हिल्स में स्थित मुख्यमंत्री आवास का बगीचा। पत्रकारों के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी। ऐसा मौका कई वर्षो बाद आया था। हमेशा अपने अंदाज से हर किसी को प्रभावित कर देने वाले शिवराज का अंदाज शुक्रवार को जुदा था। उनके चेहरे पर असहजता का भाव साफ पढ़ा जा सकता था, यह बात अलग है कि वह मुस्कुराकर और ठहाके लगाकर इस असहजता को छुपाने की कोशिश करते रहे, मगर ऐसा करने में वह सफल नहीं हुए।
भोपाल, 27 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के श्यामला हिल्स में स्थित मुख्यमंत्री आवास का बगीचा। पत्रकारों के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी। ऐसा मौका कई वर्षो बाद आया था। हमेशा अपने अंदाज से हर किसी को प्रभावित कर देने वाले शिवराज का अंदाज शुक्रवार को जुदा था। उनके चेहरे पर असहजता का भाव साफ पढ़ा जा सकता था, यह बात अलग है कि वह मुस्कुराकर और ठहाके लगाकर इस असहजता को छुपाने की कोशिश करते रहे, मगर ऐसा करने में वह सफल नहीं हुए।
शिवराज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर 29 नवंबर को 10 वर्ष पूरे कर रहे हैं, इसी सिलसिले में उन्होंने राजधानी के पत्रकारों के साथ अपने आवास पर ‘हाई-टी’ का आयोजन किया। मुख्यमंत्री चौहान तय समय से कुछ देरी से पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले पत्रकारों के बीच पहुंचते हुए देर से आने के लिए माफी मांगी और एक-एक टेबल पर जाकर पत्रकारों का अभिवादन किया।
मौसम सुहावना था, बड़े तालाब की ओर से आ रहे हवाओं के झोंके जरूर कुछ ठंड का अहसास कर जाते थे, कुल मिलाकर मौसम सुकून देने वाला था। मौसम खुशगवार था, मगर धारीवाला कुर्ता, सफेद पैजामा, हल्के रंग की जैकेट पहने मुख्यमंत्री की बॉडी लैंग्वेज और पत्रकारों से मिलने का अंदाज उनकी असहजता की कहानी खुद बयां किए जा रहा था। वह एक एक टेबिल पर जाकर पत्रकारों से मिले और उनका अभिवादन किया।
वह उस समय और ज्यादा असहज हो गए, जब एक पत्रकार ने अभिवादन के दौरान उनसे पूछा कि आपके शासनकाल के 10 वर्ष हो रहे हैं। वह कौन-सा काम है जो आप चाहकर भी नहीं कर पाए हैं। वे काफी देर तक सोचते रहे, मगर उनकी ओर से जवाब नहीं आया, तभी दूसरे ने उनकी उपलब्धियां पूछ डाली।
शिवराज ने पहले चाय पीने का आग्रह किया, फिर डकैती समस्या को खत्म करने की दिशा में किए गए काम का ब्योरा देना शुरू किया। मुख्यमंत्री जिस टेबल पर बात कर रहे थे, उस ओर जब दूसरी टेबल के पत्रकार भी पहुंचने लगे तो उन्होंने बात रोक दी।
इसके बाद दूसरी टेबल पर पहुंचे शिवराज से एक पत्रकार ने झाबुआ की हार का जिक्र कर डाला तो उन्होंने हार की वजह अपने तरह से गिनाई। उन्होंने झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ बताया। उनके चेहरे पर रतलाम की हार का मलाल अब भी साफ नजर आ रहता था, मगर बीच-बीच में वह ठहाके लगाकर चेहरे की उदासी दूर करने की कोशिश करते रहे।
बड़े तालाब के ठीक ऊपर की तरफ स्थित मुख्यमंत्री के आवास के बगीचे से पानी शांत नजर आ रहा था, मगर शिवराज के भीतर हलचल मची थी। ऐसा ही कुछ लगा उनके अंदाज को देखकर। उन्होंने किसी से हाथ मिलाया तो किसी से गले मिले। इतना ही नहीं, किसी पत्रकार के साथ अकेले तथा कुछ के साथ समूह में फोटो खिंचवाई।
चाय-नाश्ता पार्टी के दौरान शिवराज ने किसी भी पत्रकार को निराश नहीं किया, किसी ने साक्षात्कार के लिए समय मांगा तो ‘हां’ कर दी और किसी ने संवाददाता सम्मेलन का आग्रह किया तो उसे भी ‘न’ नहीं कहा।
मुख्यमंत्री शिवराज की इस हाई-टी पार्टी में वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया भी मौजूद थे। उनका कहना है, “वर्तमान कालखंड के हालात मुख्यमंत्री चैहान के अनुकूल नहीं है, रतलाम चुनाव में हार के बाद संगठन व सत्ता की समीक्षा के दौर ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। लिहाजा, वह खुद को सहज दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने यह आयोजन किया था।”
मुख्यमंत्री की असहजता की वजह दो ही मानी जा रही हैं- एक तो रतलाम संसदीय क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार की हार और दूसरा सूखे से जूझ रहे किसानों की मदद में केंद्र सरकार का साथ नहीं मिल पाना।
कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के काल में तो शिवराज अनशन तक करने को तैयार हो जाते थे, मगर अब तो वैसा भी नहीं कर सकते। उनकी विवशता समझने को कोई तैयार नहीं है।
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