उन्होंने कहा कि खुले में शौच से होने वाली बीमारी की जानकारी आम नागरिकों को देते हुए उन्हें खुले स्थान पर शौच से रोकने के सार्थक प्रयास सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को निर्मित शौचालयों का उपयोग करने के लिए जागरूक करने के लिए समाजसेवी संस्थाओं की भी भागीदारी सुनिश्चित करानी चाहिए।
भटनागर ने कहा कि किसी भी जनपद या ब्लॉक या किसी भी गांव को शौचमुक्त घोषित किए जाने के लिए मात्र शौचालयों का निर्माण ही काफी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को खुले में शौच न करने के लिए उन्हें जागरूक करना आवश्यक है।
राजधानी के एक होटल में शनिवार को स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण पर अच्छी गतिविधियां- ओडीएफ उत्तर प्रदेश हासिल करने के लिए विचार मंथन के लिए आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि देश में उत्तर प्रदेश को शौचमुक्त प्रथम प्रदेश घोषित कराने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ग्राम स्तरीय अधिकारियों की विशेष भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणवासियों को ग्राम स्तरीय अधिकारी खुले में शौच न करने के लिए जागरूक करने में अधिक सफल हो सकते हैं। अभियान चलाकर ग्रामीणवासियों को खुले में शौच करने से होने वाली बीमारियों से जागरूक किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश शौचालयों के निर्माण में देश में नंबर वन है, उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन 8-10 हजार शौचालयों का निर्माण विभिन्न स्थानों पर विभागीय अधिकारियों द्वारा बनवाया जाना सराहनीय कार्य है।
प्रमुख सचिव, पंचायती राज चंचल कुमार तिवारी ने कहा कि खुले में शौच से मुक्त घोषित ग्रामों के वेरिफिकेशन में हम अभी थोड़ा पीछे हैं, लेकिन उसके लिए भी शासनादेश जारी कर दिया गया है।
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