भोपाल, 21 अगस्त (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के विंध्य और बुंदेलखंड में बाढ़ द्वारा मचाई गई तबाही की हकीकत जानने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद बाढ़ प्रभावित शहरी बस्तियों से लेकर गांव तक पहुंचे। उन्होंने रविवार को रीवा और पन्ना के कई गांव जाकर तबाही का मंजर देखा और प्रभावितों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है और हरसंभव मदद करेगी।
रीवा, सतना और पन्ना में बारिश ने जमकर तबाही मचाई है। इन जिलों के लगभग डेढ़ सौ गांव बाढ़ की जद में हैं। प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। चौहान ने प्रभावित बस्तियों, गांव व राहत शिविरों तक पहुंचकर कहा कि बाढ़ से प्रभावित हर व्यक्ति को सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि एक-एक घर का सर्वे कर क्षति का आकलन कर सहायता राशि के साथ ही पुनर्वास सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बाढ़ के दौरान किसी की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को मुआवजे के रूप में चार लाख रुपये दिए जाएंगे। मकान पूर्णत: क्षतिग्रस्त होने पर 95 हजार रुपये और बाढ़ प्रभावित परिवार को 50 किलो गेहूं दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ से गाय-भैंस की मृत्यु पर 30 हजार रुपये, बछड़ा-बछड़ी की मृत्यु पर 10000 रुपये, सुअर की मृत्यु पर 3000 रुपये, मुर्गा-मुर्गी की मृत्यु पर 60 रुपये की सहायता संबंधित को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि झुग्गियों और दुकानों के क्षतिग्रस्त होने पर तत्काल सहायता के तौर पर 6000 रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी-नालों के किनारे बसे व्यक्तियों को उनकी सहमति से सुरक्षित स्थान पर बसाने का भी कार्य किया जाएगा, जिससे उन्हें निचले इलाकों में आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान से हमेशा के लिए निजात दिलवाई जा सके। मुख्यमंत्री रीवा में निपानिया, पदमधर कलोनी सहित अनेक बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
चौहान ने निर्देश दिए कि शहर में मलबा हटाकर व्यापक पैमाने पर सफाई कार्य किया जाए। ब्लीचिंग पाउडर और दवाई का छिड़काव किया जाए, ताकि बीमारी न फैले। मृत पशुओं को तत्काल उठवाने के निर्देश दिए। वे त्यौंथर और जवा भी गए और राहत-पुनर्वास कार्यो का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री चौहान बाढ़ प्रभावितों के लिए बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में भी पहुंचे। उन्होंने प्रभावितों के लिए दिए जाने वाले भोजन और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री ने पीड़ितों से कहा, “मैं आपके दुख-दर्द में सहभागी बनने आया हूं। आपको हरसंभव सहायता दी जाएगी।” उन्होंने स्वयं अपने हाथों से बाढ़ प्रभावितों को नाश्ता दिया।
मुख्यमंत्री निपनिया, अमरैया टोला भी गए। मुख्यमंत्री बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए मोहनलाल साकेत के घर भी गए। उन्होंने इन क्षेत्रों में पानी निकासी के लिए नाली निर्माण करवाने को कहा। चौहान विक्रम पुल, उन्नत पुल और झिरिया पुल भी गए। उन्होंने पानी के फैलाव से भी आपदा का अवलोकन किया। इस दौरान उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ल, सांसद जनार्दन मिश्रा भी उनके साथ थे।
इससे पहले मुख्यमंत्री चौहान शनिवार को मौसम खराब होने के चलते ट्रेन से सतना और फिर मैहर पहुंचे थे। जहां एक इमारत ढह गई थी। इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी।
राज्य में बाढ़ और अति वर्षा से अब तक तीन लाख 79 हजार 542 आबादी प्रभावित हुई। वहीं 102 लोगों की जानें गई हैं। जबलपुर जिले में सर्पदंश से हुई 14 लोगों की मौत, इसमें शामिल है। पंद्रह लोग घायल हुए हैं और सात लोग लापता है।
इसके अलावा वर्षा से 2638 मकान पूरी तरह और 38 हजार 641 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। बाढ़ के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में समय-समय पर संचालित राहत शिविरों की संख्या 135 रही है। इन शिविरों का उपयोग 19 हजार छह लोग ने किया। मानसून मौसम में सबसे ज्यादा सतना में 30 और रीवा में 27 शिविर वर्तमान में संचालित किए जा रहे हैं।
मानसून के तल्ख मिजाज ने प्रदेश के 26 जिलों में 281 पशुहानि हुई। पन्ना जिले में दो बांध फूटें और छतरपुर जिले में दो पुलिया क्षतिग्रस्त हुई।
प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़ से उत्पन्न स्थिति में राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की 117, एसडीआरएफ की 5000 और पुलिस की 800 टीम कार्यरत है।
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