उन्होंने भीम आर्मी के युवा नेता चंद्रशेखर उर्फ रावण से रासुका हटाकर रिहा करने की मांग भी की।
भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने आईपीएन से बातचीत में कहा कि योगीराज में एक तरफ अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दलितों की न्याय की मांग का भी गला घोंटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये दोनों घटनाएं लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली और फासीवाद की आहट का प्रतीक हैं।
माले नेता ने कहा कि वामपंथी नेता को राजधानी में बोलने से भगवा संगठन के लोगों ने रोका और उन पर शारीरिक हमला किया, जो दिखाता है कि संघ-भाजपा को गुंडागर्दी करने की खुली छूट मिली हुई है। वहीं शब्बीरपुर के दलितों पर सामंती ठाकुरों के हमले की घटना में न्याय करने की आवाज उठाने वाले दलित नेता के खिलाफ फर्जी आरोपों में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानतें मंजूर कर लीं, तो रातोंरात उन पर रासुका लगाकर फिर जेल भेज दिया गया।
उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से बीमार दलित नेता के स्वास्थ्य की भी शासन-प्रशासन ने परवाह नहीं की। यह इस बात का प्रमाण है कि ‘योगी सरकार लोकतंत्र और दलित विरोधी है।’
माले नेता ने कहा कि कन्हैया कुमार के हमलावरों को जेल भेजा जाना चाहिए और चंद्रशेखर को मुक्त कर उनका समुचित इलाज कराया जाना चाहिए, लेकिन योगीराज में बिल्कुल उल्टा हो रहा है।
dharmpath.com dharmpath