नई दिल्ली, 20 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को दिल्ली के पूर्व मंत्री संदीप कुमार के हवाले से एक वकील द्वारा दायर की गई याचिका को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कुमार की जान को खतरा है। याचिका में जेल में सीसीटीवी कैमरे लगाने और अदालत में उनकी पेशी की वीडियो रिकॉर्डिग का निर्देश देने की मांग भी की गई थी।
विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी ने पूर्व मंत्री के यह कहने पर कि उन्होंने ए.पी. सिंह को अपना वकील नियुक्त नहीं किया है और सिंह ने वकालतनामे में खुद को उनके वकील प्रदीप राणा का सहयोगी बताते हुए हस्ताक्षर लिए थे, अधिवक्ता ए.पी. सिंह की याचिका रद्द कर दी।
हालांकि, सिंह ने कुमार के कथन का खंडन करते हुए कहा आम आदमी पार्टी सरकार के पूर्व मंत्री ने अपनी मर्जी से उन्हें अपना वकील नियुक्त किया था।
इसी बीच, अदालत ने कुमार की न्यायिक हिरासत चार अक्टूबर तक बढ़ा दी है।
कुमार की पत्नी रितु और वकील प्रदीप राणा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में सिंह के दावे का खंडन किया।
रितु ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार सुबह अपने पति से जेल में मुलाकात की थी। उन्होंने साथ ही कहा कि यह दावा गलत है कि उनके साथ मारपीट की गई है। रितु ने कहा कि न ही उन्होंने और न ही संदीप कुमार ने, किसी ने भी सिंह को उनका वकील नहीं नियुक्त किया है।
दिल्ली सरकार में पूर्व समाज कल्याण और महिला एवं बाल विकास मंत्री को तीन सितंबर को एक महिला की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था। महिला का आरोप है कि पूर्व मंत्री ने उसका यौन शोषण किया था।
dharmpath.com dharmpath