संयुक्त राष्ट्र, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। सतर्क वित्तीय नीति, कम महंगाई दर और कुछ क्षेत्रों में सुधार से आगामी वित्त वर्ष में देश की विकास दर 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है। यह बात संयुक्त राष्ट्र के एक आर्थिक विशेषज्ञ ने कही।
संयुक्त राष्ट्र, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। सतर्क वित्तीय नीति, कम महंगाई दर और कुछ क्षेत्रों में सुधार से आगामी वित्त वर्ष में देश की विकास दर 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है। यह बात संयुक्त राष्ट्र के एक आर्थिक विशेषज्ञ ने कही।
गुरुवार को जारी ‘यूएन इकनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड पैसेफिक (ईएससीएपी)-2016’ सवेक्षण में जारी अनुमान के मुताबिक देश की विकास दर 2015 में 7.6 फीसदी, 2016 में भी 7.6 फीसदी और 2017 में 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है, जो इस क्षेत्र और दुनियाभर की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सर्वाधिक है।
2014 में देश की विकास दर 7.3 फीसदी थी।
ईएससीएपी के मुताबिक महंगाई दर 2015 में घटकर पांच फीसदी हो गई, जो 2016 में बढ़कर 5.2 फीसदी और 2017 में 5.6 फीसदी रहेगी। महंगाई दर 2014 में 6.7 फीसदी थी।
संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (डीईएसए) में आर्थिक मामलों के अधिकारी सेबेस्टियन वर्गरा ने कहा, “आर्थिक नीति खासकर वित्तीय नीति सतर्कता भरी रही है, लेकिन उपभोक्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए बेहतर प्रारूप देने के लिए यह एक सकारात्मक विकासक्रम है।”
रिपोर्ट जारी होने के बाद भारत के प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “महंगाई दर घटाने में मौद्रिक नीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसकी भारतीय अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक भूमिका रही है।”
सुधार को तेज विकास के लिए चुनौती बताते हुए भी उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “संरचनागत सुधार के क्षेत्र में तस्वीर मिली-जुली है। कुछ क्षेत्रों में भारत सरकार ने महत्वपूर्ण कोशिशें की है और इसका प्रतिफल भी मिलना शुरू हो गया है, जिससे निवेश बढ़ा है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में सुधार धीमी गति से हो रहा है।”
रिपोर्ट में क्षेत्र के कुछ अन्य देशों के विपरीत भारत में विकास में योगदान करने वाले कारकों में निजी खपत को महत्वपूर्ण बताया गया है।
रिपोर्ट में हालांकि कहा गया है, “कमजोर मानसून के कारण कृषि गतिविधि कम रहने और पगार कम रहने से गांवों में मांग कम रही।”
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