सपा संग्राम : महाबैठक बेनतीजा, अखिलेश-शिवपाल ने अपनी बात रखी (लीड-1)

लखनऊ, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर मचे सियासी संग्राम में कई चेहरे हैं, जो एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। लेकिन पार्टी के कद्दावर नेताओं की निगाह पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव पर टिकी थी। रामगोपाल और अमर सिंह के मुद्दे पर अखिलेश और मुलायम खुलकर बोले। अखिलेश ने जब कहा कि अमर सिंह की वजह से सबकुछ खत्म हो रहा है, तो शिवपाल यादव ने कहा कि तुम लोग उनके पैरों के धूल बराबर भी नहीं हो।

मुलायम ने पार्टी के सभी विधायकों, विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई थी। बैठक में जब अखिलेश ने बोलना शुरू किया तो उनकी आवाज में तल्खी भी थी, तंज भी था, भावुकता भी थी और ²ढ़ इरादा भी। उन्होंने शुरुआत में ही कहा कि उनके लिए कभी पद मायने नहीं रहा। वह जनता की सेवा करने के लिए नेता जी के कहने पर राजनीति में आए थे।

अखिलेश ने कहा कि उन्होंने तय कर लिया कि पार्टी के खिलाफ साजिश रचने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। वह नेता जी का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। नई पार्टी बनाने के बारे में कभी नहीं सोचा।

अमर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “एक शख्स की वजह से बहुत कुछ दांव पर लग गया, लेकिन उसके लिए आप रामगोपाल को दोषी नहीं ठहरा सकते हैं। रामगोपाल ने कभी भी उनको बरगलाने की कोशिश नहीं की। लेकिन आज उनके नाम पर सियासत की जा रही है।”

अखिलेश के संबोधन के तुंरत बाद शिवपाल ने 1975 के प्रंसगों का जिक्र किया कि किस तरह से वह साइकिल पर सवार होकर नेताजी की चिट्ठियां गांव-गांव बांटा करते थे।

शिवपाल ने कहा कि जिस पार्टी को खून-पसीने से सींचा, उसे खत्म करने की बात वह नहीं सोच सकते हैं। राम गोपाल ने कहा कि वह गंगाजल और बेटे की सौगंध खाकर कहते हैं कि अखिलेश ने कहा था कि वह एक नई पार्टी बनाएंगे।

उन्होंने कहा, “2012 में सरकार में आने के पहले जब अखिलेश यादव को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो उन्होंने खुले दिले से नेताजी के फैसले का स्वागत किया। मुख्यमंत्री बनाने की जब बात आई तो खुले दिल से नेताजी के आदेश का सम्मान किया। लेकिन बदले में क्या मिला। आज वह खुद को ठगा महसूस करते हैं। सच तो यह है कि उन्हें तिरस्कार और अपमान मिलता रहा।”

रामगोपाल पर निशाना साधते हुए शिवपाल ने कहा, “एक शख्स जो जमीनों पर कब्जा करने में शामिल है, भ्रष्टाचार में शामिल है, पार्टी के अंदर साजिश करता है, क्या उसे महत्व मिलना चाहिए। क्या हम एक ऐसे शख्स के पीछे चल सकते हैं, जिसके पास 10 वोट हासिल करने की कुवत नहीं है। लेकिन दुख है कि वह शख्स अपनी मनमर्जी करता है। अपने हिसाब से मुख्यमंत्री को निर्देशित करता है। अगर ऐसे लोग हैं तो पार्टी में रहने का कोई मतलब नहीं है।”

अमर की तारीफ में उन्होंने कहा, “हम उनके योगदान को कैसे भूल सकते हैं। संकट के समय वह पार्टी के साथ पूरी शिद्दत से जुड़े रहे। लेकिन कुछ लोगों को यह मंजूर नहीं था। अपने निहित मकसद पूरा न होते देख वे अमर सिंह के विरोध पर उतर आए। उनके खिलाफ अनर्गल प्रलाप करते रहे। लेकिन दुख की बात यह कि मुख्यमंत्री इस सबसे अंजान बने रहे। उन्होंने यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर सच क्या है।”

शिवपाल ने कहा कि छिपकर उन्होंने “अमर सिंह से कभी मुलाकात नहीं की। तुम लोग उनके पैरों के धूल बराबर भी नहीं हो।”

मुख्तार अंसारी के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “कुछ लोग अफवाह फैलाते रहे कि उन्हें (मुख्तार) पार्टी में शामिल किया गया है। लेकिन सच सबको पता है कि मुख्तार अंसारी को कभी पार्टी में शामिल नहीं किया गया था। लेकिन मुख्यमंत्री साहब सच जानना ही नहीं चाहते थे।”

शिवपाल ने कहा कि उनको जलील किया गया। हालात ये बन गए कि अफसर उनकी बात नहीं सुनते थे। उनके विभाग के कामों की समीक्षा कराई जाती रही है। इस तरह के कार्यो से किस तरह के संदेश दिए गए, ये सबको पता है। वह नेता जी के लिए हमेशा प्रतिबद्घ रहे हैं, और आगे भी रहेंगे।

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