नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘2022 तक सबको आवास’ कार्यक्रम शुरू करने को मंजूरी दे दी। सरकार के इस फैसले का कारोबारियों और उद्योग संघों ने स्वागत किया।
कनफेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीआरईडीएआई) के अध्यक्ष मनोज गौर ने आईएएनएस से कहा, “आवासीय क्षेत्र में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। हर पक्ष को इसका लाभ मिलेगा।”
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के महासचिव डीएस रावत ने कहा, “2022 तक सबको आवास योजना यदि कार्यान्वित हो जाती है, तो इससे न सिर्फ वंचितों को लाभ मिलेगा, बल्कि देश में आर्थिक तेजी भी आएगी।”
उन्होंने कहा, “यदि हम सफल होते हैं, तो शहर स्मार्ट शहर में तब्दील हो जाएगा, क्योंकि परियोजना का मकसद शहरों को स्वच्छ, स्मार्ट और कम खर्च वाला बनाना है।”
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुबह हुई बैठक के बाद यहां जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि झुग्गी पुनर्वास कार्यक्रम के तहत प्रति मकान औसतन एक लाख रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी।
बयान में कहा गया है कि झुग्गी वासियों को मकान उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार के पास इस सहायता को किसी भी झुग्गी पुनर्वास परियोजना पर खर्च करने की सुविधा होगी।
बयान में कहा गया है, “ऋण-संबद्ध ब्याज छूट घटक के तहत आर्थिक रूप से कमजोर तबके/निम्न आय समूह (ईडब्ल्यूएस/एलआईजी) श्रेणी में 15 साल तक की अवधि हेतु लिए गए आवास ऋण पर 6.5 फीसदी ब्याज छूट दी जाएगी, जिसमें दोनों ही श्रेणियों में शुद्ध वर्तमान मूल्य पर कुल सब्सिडी प्रति मकान 2.3 लाख रुपये होगी।”
बयान के मुताबिक, सस्ते आवास योजना के तहत ईडब्ल्यूएस श्रेणी में प्रति मकान 1.5 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता दी जाएगी।
बयान में कहा गया है कि केंद्रीय सहायता का लाभ उठाने के लिए राज्य सरकार और उनके अधीन निकाय जैसे हाउसिंग बोर्ड सस्ते मकान योजना के तहत परियोजना शुरू कर सकते हैं।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि सबको आवास योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना होगी।
उन्होंने कहा, “यह योजना केंद्र प्रायोजित योजना होगी, सिवाय ऋण-संबद्ध छूट घटक के, जिसका कार्यान्वयन केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में होगा।”
योजना के तहत आवंटित मकान या तो परिवार की प्रमुख महिला के नाम होगा या प्रमुख पुरुष और उसकी पत्नी के नाम संयुक्त रूप से होगा।
योजना तीन चरणों में पूरी होगी। प्रथम चरण (अप्रैल 2015 से मार्च 2017) में 100 शहर चुने जाएंगे। चरण-2ए (अप्रैल 2017-मार्च 2019) में 200 और शहरों का चुनाव होगा। तीसरे चरण (अप्रैल 2019-मार्च 2022) में शेष सभी शहरों में योजना कार्यान्वित की जाएगी।
योजना के तहत अनुमानत: दो करोड़ मकान बनेंगे।
बनने वाले मकानों की सटीक संख्या तब सामने आएगी, जब इसके लिए आधार संख्या, जन धन योजना खाता संख्या या इसी तरह लाभार्थियों की किसी भी पहचान के आधार पर मांग से संबंधित सर्वेक्षण कराए जाएंगे।
इस योजना के तहत एक प्रौद्योगिकी उप मिशन स्थापित किया जाएगा, जो पर्यावरण अनुकूल और तेज काम की सुविधा उपलब्ध कराएगा।
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