नई दिल्ली, 1 जनवरी (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर दिल्ली सरकार की सम-विषम योजना का समर्थन करते हैं, क्योंकि इससे लोगों की आदतों में बदलाव होगा और वे सार्वजनिक परिवहन अपनाएंगे।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर दिल्ली सरकार की सम-विषम योजना का समर्थन करते हैं, क्योंकि इससे लोगों की आदतों में बदलाव होगा और वे सार्वजनिक परिवहन अपनाएंगे।
कांग्रेस के आधिकारिक संवाददाता सम्मेलन में यहां चिदंबरम ने दिल्ली सरकार की सम-विषम योजना पर एक सवाल के जवाब में कहा, “जहां तक मेरा सवाल है, मैं इस योजना का समर्थन करता हूं।”
कांग्रेस पार्टी आधिकारिक तौर पर ठीक इसके विपरीत अरविंद केजरीवाल सरकार द्वारा इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर आपत्ति जताती रही है, जबकि वह कहती रही है कि उसने इसका कभी विरोध नहीं किया।
यह योजना पहली जनवरी से 15 दिनों के लिए लागू की गई है। योजना के तहत विषम पंजीकरण संख्या वाली कारें विषम तारीखों को और सम संख्या वाली कारें सम तिथियों को चलेंगी। कुछ वाहनों को इस योजना से छूट दी गई है।
चिदंबरम ने कहा कि यह योजना स्थायी तौर पर नहीं लागू हो सकती, लेकिन समय-समय पर इसे 15 दिनों के लिए लागू किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “मैं समझता हूं कि थोड़ी अवधि के लिए यह महत्वपूर्ण है। लोगों की आदतें बदलने के लिए इस तरह की योजना लागू करना आवश्यक है।”
चिदंबरम ने कहा, “अधिक कारें खड़ी होंगी, लोग मेट्रो का सहारा लेंगे, बाजार पैदल जाएंगे। इस तरह मैं समझता हूं कि आदतें बदलेंगी, लेकिन देखते हैं कि यह कितना कारगर होता है। मैं उन्हें शुभकानाएं देता हूं।”
चिदंबरम ने स्वीकार किया कि इससे लोगों को कुछ असुविधा होगी, लेकिन यह लोगों की आदतें बदलने के लिए है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यदि मैंने मेट्रो से सफर नहीं किया है, तो यह योजना मुझे मेरी आदत बदल सकती है और सप्ताह में दो बार मेट्रो के सफर के लिए बाध्य कर सकती है।”
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बाद में मीडियाकर्मियों से कहा कि कांग्रेस ने सैद्धांतिक रूप से इस योजना का कभी विरोध नहीं किया।
उन्होंने कहा कि इसके क्रियान्वयन से दिल्ली के लोगों या बाहर से यहां आने वालों को सफर में कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा पर्याप्त संख्या में बसों का बंदोबस्त किया जाना चाहिए।
सुरजेवाला ने यह भी कहा कि “दिल्ली में कुल प्रदूषण स्तर में वाहन से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत है, जबकि धूल कणों का योगदान 22 प्रतिशत है।”
उन्होंने यह भी कहा कि हरेक रात अन्य राज्यों के लिए दिल्ली से होकर जाने वाले ट्रकों से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।
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