नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। पुरस्कार प्राप्त पत्रकार जोसी जोसेफ ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की भयभीत करने वाली केंद्रीकृत प्रणाली है और यह बुद्धिमत्तापूर्ण और जानकारी रखने वाली सोच के प्रति शत्रुतापूर्ण है।
जोसेफ ने कारवां पत्रिका और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘नॉन-फिक्शन इन द एज ऑफ फियर’ (डर के युग में गैर-काल्पनिकता) विषय पर हुई चर्चा के दौरान कहा, “यह सरकार जिस तरह से पत्रकारों के साथ व्यवहार कर रही है, ऐसा मैंने पहले कभी नहीं देखा। इस सरकार की भयभीत करने वाली केंद्रीकृत प्रणाली है। यह बुद्धिमतापूर्ण और जानकारी रखने वाली सोच के बेहद शत्रुतापूर्ण है। यह किसी भी प्रगतिवादी सोच को निशाना बनाती है।”
जोसेफ ने 2016 में प्रकाशित अपनी किताब ‘अ फीस्ट ऑफ वल्चर्स’ में जेट एयरवेज के सह-संस्थापक नरेश गोयल और माफिया सरगना दाऊद इब्राहीम के कथित संबंधों का जिक्र किया है, जिसके बाद गोयल ने जोसेफ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
जोसेफ ने कह, “नरेश गोयल ने हर मंत्री, हर सचिव को पूरी कामयाबी से अपने पाले में कर रखा है। अगर फाइलों पर नजर डाला जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि एजेंसियों को गोयल और दाऊद के बीच संबंधों को बारे में पता है। उन्हें मिलने वाली वित्तीय सहायता पर भी सवाल उठा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय राजनीतिक प्रणाली को बनाए रखने के लिए पैसे की भारी मात्रा की जरूरत होती है और यह कॉरपोरेट जगत द्वारा वित्त पोषित है।
जोसेफ कहते हैं कि भाजपा ने बहुत महंगी व्यापार प्रणाली का निर्माण किया है। नरेश गोयल और उनके जैसे लोग राजनीतिकदलों को चलाते हैं क्योंकि भारतीय राजनीतिक दलों को काले धन और वित्तीय सहायता की जरूरत होती है। राजनीतिक प्रणाली को बनाए रखने के लिए अरबों रुपये की जरूरत होती है, जिसे कॉरपोरेट द्वारा मुहैया कराया जाता है।
यह पूछे जाने पर कि क्या बिचौलियों के संदर्भ में कुछ किया जा सकता है, जोसेफ कहते हैं कि मोदी बिचौलियों के बारे में कुछ नहीं कर सकते, वह स्थिति और बद्तर कर देंगे।
‘अ फिस्ट ऑफ वल्चर्स’ में भारतीय समाज में व्याप्त हर स्तर के भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया है। इस किताब को इस साल जयपुर साहित्य महोत्सव में नहीं शामिल किया गया।
इस चर्चा में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार मिलने पर इसे ठुकरा देने वाले पत्रकार अक्षय मुकुल भी शमिल हुए। अक्षय पुरस्कार समारोह में इसलिए नहीं पहुंचे क्योंकि वह मोदी के हाथ से यह सम्मान प्राप्त नहीं करना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि 2002 में हुए गुजरात दंगे के बाद से मोदी मीडिया से डरने लगे हैं। हाल में एनडीटीवी के साथ जो किया गया, उसे हम सब जानते हैं। किरन रिजीजू (केंद्रीय गृह राज्य मंत्री) को यह कहते सुना गया कि ‘सवाल मत पूछो’ ।
वह कहते हैं कि पुरस्कार अपने आप में प्रतिष्ठित होते हैं, इसे मोदी या किसी और प्रधानमंत्री की जरूरत नहीं होती, इससे यह और प्रतिष्ठित नहीं बन जाता।
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