नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। राज्यसभा सदस्य के.टी.एस.तुलसी ने सोमवार को कहा कि ऐसे वक्त में जब खेती-किसानी मुसीबत के दौर से गुजर रही है, तब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू न कर केंद्र सरकार ने देश की जनता के साथ विश्वासघात किया है।
किसानों के राष्ट्रीय आयोग के प्रमुख एम.एस.स्वामीनाथन ने एक एमएसपी की सिफारिश की थी, जो उत्पादन लागत की तुलना में 50 फीसदी अधिक है।
तुलसी ने राज्यसभा में कहा, “हम सभी सदस्यों को यह स्मरण होगा कि चुनाव के दौरान किसानों से बार-बार वादा किया गया था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य एम.एस.स्वामीनाथन के फॉर्मूले के मुताबिक होगा, जो लागत मूल्य की तुलना में 50 फीसदी अधिक है।”
उन्होंने कहा, “सूचना का अधिकार के तहत छह मई को मिले एक जवाब में हमने पाया है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि इससे बाजार में विकृतियां बढ़ेंगी।”
उन्होंने कहा, “इसके लिए औपचारिक तौर पर घोषणा की गई थी। यह लोगों के साथ विश्वासघात है, खासकर जब देश में 3,228 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।”
तुलसी ने कहा कि अकेले महाराष्ट्र में 2,911 किसानों ने खुदकुशी की है।
सरकार की आलोचना में कई अन्य सदस्यों ने तुलसी का साथ दिया।
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