सर्वोच्च न्यायालय ने गोरक्षकों पर 6 राज्यों से जवाब मांगा (लीड-1)

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने हिसा में लिप्त स्वयंभू गोरक्षक समूहों को नियंत्रित करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को इस संदर्भ में छह राज्यों से जवाब मांगा।

इस तरह के गोरक्षक समूह बीफ व्यापार में शामिल होने के संदेहभर से ही लोगों पर हमले कर रहे हैं।

महाधिवक्ता रंजीत कुमार ने न्यायालय से कहा कि इस मामले में अभी तक राज्यों को कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया गया है, जिसके बाद न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा तथा न्यायमूर्ति ए.एम.खानविलकर की पीठ ने एक नोटिस जारी किया।

न्यायालय ने इससे पहले केंद्र सरकार से इस याचिका पर जवाब मांगते हुए नोटिस जारी किया था।

जिन छह राज्यों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और झारखंड शामिल हैं।

नोटिस तहसीन एस.पूनावाला की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि 21 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि जनहित याचिका के आधार पर केंद्र तथा छह राज्यों -कर्नाटक, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान- को नोटिस दिया जाए।

न्यायालय ने सात नवंबर को केंद्र सरकार तथा छह राज्यों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का वक्त दिया था।

केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो जनवरी को अतिरिक्त चार सप्ताह का वक्त दिया गया।

सामाजिक कार्यकर्ता पूनावाला ने गोरक्षा दलों पर पाबंदी लगाने तथा गोरक्षण के नाम पर उनके द्वारा दलितों व अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी।

अपनी याचिका में पूनावाला ने गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक तथा झारखंड में कई हिंसक घटनाओं का संदर्भ दिया तथा गोरक्षा दलों द्वार सोशल मीडिया पर अपलोड की गई हिंसक सामग्री को हटाने के लिए निर्देश देने की मांग की।

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