साजिश के तहत भेजा गया था जेल : कुशवाहा

उन्होंने आरक्षण की वकालत कर जहां वोटरों की नब्ज टटोली, वहीं बसपा पर निशाना साधा और कहा कि समय आने पर हर एक बात का हिसाब लिया और दिया भी जाएगा।

जिले में अपनी यात्रा लेकर पहुंचे बाबू सिंह कुशवाहा का जिले की सीमा से लेकर हरदोई तक स्वागत किया गया। भीड़ से भरे मैदान को देखकर बाबू सिंह का चेहरा खिल उठा। उन्होंने कहा कि 14 मार्च को बुंदेलखंड के झांसी कमिश्नरी के जालौन जिले से चलाई गई इस यात्रा का यह 64वां पड़ाव है।

कुशवाहा ने बताया कि इस दौरान कहीं पांच सौ तो कहीं पांच हजार से लेकर तीस हजार तक की भीड़ ने उनको सुना। 458 जगहों पर उनकी जनसभा हुई।

अन्होंने कहा, “आज देश व प्रदेश में आरक्षण को लेकर ही चर्चा की जा रही है। आरक्षण आने वाली पीढ़ियों के हितों से जुड़ा है।”

कुशवाहा ने कहा, “54 प्रतिशत पिछड़ी जाति के लोग हैं, लेकिन आरक्षण मात्र 27 प्रतिशत को और उनमें भी जो पढ़े लिखे हैं, वे ही इसका लाभ उठार जा रहे हैं। सरकार जातीय जनगणना के आधार पर आरक्षण का कोटा तय कर दे। राजा मरे को जिंदा नहीं कर सकता लेकिन जिंदा को जीने लायक बना सकता है।”

उन्होंने बसपा को निशाने पर लेते हुए कहा, “जब मैंने प्रदेश की 49 कोऑपरेटिव बैंकों के 40 चेयरमैन पिछड़ी जाति के बनवाए और जिला पंचायतों में हिस्सेदारी दिलाई तो सरकार के चार-पांच लोगों ने साजिश के तहत मुझे फंसाया और पिछड़ों के उत्थान को रोकने का काम किया और डॉक्टरों की हत्या में मुझसे इस्तीफा लिया और हत्यारों को बचाने के साथ मुझे जेल भेज दिया।”

उन्होंने बताया कि आरोप लगाया कि चिकित्सकों के हत्यारों को बचाने के साथ क्राइम के मामले में पुलिस पर कार्रवाई न करके एनआरएचएम का हंगामा खड़ा किया गया, ताकि हत्यारे बच जाएं।

वहीं, डॉक्टर अरुण मौर्या ने कहा कि वह कुशवाहा से दस वर्षों से जुड़े हैं। कुछ लोग कुशवाहा की लोकप्रियता देखकर ही उनके विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे, क्योंकि पार्टियों को कुशवाहा की लोकप्रियता हजम नहीं हो रही।

सभा को अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। इस दौरान मंच के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार मौर्य भी मौजूद रहे।

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