नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को यहां ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट लीडरशिप अवॉर्ड’ से सम्मानित किया।
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को यहां ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट लीडरशिप अवॉर्ड’ से सम्मानित किया।
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (टेरी) द्वारा आयोजित ‘विश्व सतत विकास सम्मेलन’ में चामलिंग को सिक्किम को पूर्ण रूप से जैविक राज्य बनाने के लिए किए गए प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।
यहां जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को सिक्किम को देश का पहला और एकमात्र जैविक राज्य बनाने के लिए पर्यावरण और सतत विकास में नेतृत्व के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया है।”
सिक्किम भारत का एकमात्र राज्य है, जिसे 2016 में पूर्ण जैविक राज्य का आधिकारिक दर्जा दिया गया था।
सिक्किम की करीब 75,000 हेक्टेयर भूमि को प्रमाणित जैविक भूमि में परिवर्तित किया जा चुका है और भारत के कुल 12.4 लाख टन जैविक उत्पादन में से 80,000 टन जैविक उत्पादन सिक्किम में होता है।
बयान के मुताबिक, “चामलिंग ने कई हरित पहल की हैं। 1995 में पूरे राज्य में पान मसाले/गुटके पर रोक लगा दी गई थी और 1997 में सार्वजनिक नालियों और सीवरेज में नष्ट न होने वाला कचरा फेंकने के निषेध पर एक कानून पारित किया गया था।”
राज्य में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पर भी प्रतिबंध है।
राष्ट्रपति ने चामलिंग को बधाई देते हुए कहा, “सिक्किम ने प्रकृति और विकास के बीच तालमेल स्थापित किया है। दशकों से इस खूबसूरत भूमि के लोगों ने उन पर अपना भरोसा जताया है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया की असली और तात्कालिक चिंता है और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को इससे ज्यादा खतरा है।
उन्होंने कहा, “एक विकासशील देश के तौर पर हमें चिंतित होना चाहिए। भारत में दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी है, लेकिन यहां केवल चार प्रतिशत पानी है और वैश्विक ऊर्जा के केवल छह फीसदी की खपत होती है। इस समय जब हम यहां इस पर बात कर रहे हैं, 25 करोड़ लोग बिजली की पहुंच से दूर हैं।”
राष्ट्रपति ने कहा, “हमें बाजार में कृत्रिम मांग पैदा करने के लिए कचरे को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। हमारे पास कई चुनौतियां हैं और उनसे निपटने की क्षमता भी है। हमें संसाधनों के बड़े पैमाने पर उपयोग को लेकर भी चिंतित होना चाहिए। हमें इन संसाधनों को बर्बाद करने का कोई अधिकार नहीं है।”
मुखर्जी ने अस्थिर खपत के पैटर्न के खिलाफ दुनिया को सावधान करते हुए कहा कि स्थायी अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त करने के लिए वैश्विक साझेदारी की आवश्यकता है।
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