सीमा में बांधकर कलाकारों का कैनवास छोटा न करें : संजय मिश्रा

नई दिल्ली, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। शाहरुख खान और सलमान खान जैसे सुपरस्टारों ने रूमानी से लेकर नकारात्मक और मारधाड़ से भरी भूमिकाएं निभाई हैं, लेकिन चरित्र कलाकारों को इस प्रकार के विविध किरदार निभाने के मौके नहीं मिल पाते हैं। यह कहना है अभिनेता संजय मिश्रा का।

नई दिल्ली, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। शाहरुख खान और सलमान खान जैसे सुपरस्टारों ने रूमानी से लेकर नकारात्मक और मारधाड़ से भरी भूमिकाएं निभाई हैं, लेकिन चरित्र कलाकारों को इस प्रकार के विविध किरदार निभाने के मौके नहीं मिल पाते हैं। यह कहना है अभिनेता संजय मिश्रा का।

संजय अपने उत्कृष्ट अभिनय से भारतीय सिने दर्शकों के दिलों पर राज करते रहे हैं।

संजय ने इस साल ‘मसान’, ‘मिस तनकपुर हाजिर हो’, ‘मेरठिया गैंगस्टर्स’ और ‘प्रेम रतन धन पायो’ जैसी फिल्मों में अपनी सशक्त मौजूदगी दर्शाई है।

संजय को इस बात का अफसोस है कि चरित्र अभिनेताओं को अपना किरदार खुद चुनने का मौका नहीं मिलता और इस वजह से वे एक खास शैली या खांचे में बांट दिए जाते हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या फिल्म उद्योग कलाकारों को शैलियों में विभाजित करता है, संजय ने आईएएनएस से कहा, “निश्चित तौर पर। जब कोई निर्माता किसी फिल्म में अपना पैसा लगाता है और उसे लगता है कि संजय मिश्रा किसी खास चरित्र को अच्छी तरह निभा सकता है, तो वह उसके लिए मुझे कास्ट कर लेता है।”

संजय ने आगे कहा, “लेकिन नीरज घेवाण और रजत कपूर जैसे भी कुछ लोग हैं, जो हम जैसे चरित्र कलाकारों को अलग नजर से देखते हैं और मानते हैं कि हम अन्य तरह की भूमिकाओं में भी फिट हो सकते हैं।”

संजय ने कहा, “सिनेमा का एक नया दौर आ रहा है, जिसमें मुझे कई गंभीर किरदार निभाने का मौका भी मिलेगा।”

संजय को ‘ऑफिस ऑफिस’ में भ्रष्टाचारी शुक्ला और ‘दम लगा के हईशा’ में चंद्र प्रकाश तिवारी के नुक्ताचीनी करने वाले पिता जैसी कई शानदार भूमिकाएं निभाने के लिए सराहा जाता है।

संजय का कहना है कि सिने उद्योग जोखिम नहीं उठाना चाहता।

उन्होंने कहा, “फिल्मकार और निर्माता कहते हैं कि किसी व्यक्ति ने पहले जो भूमिका निभाई है उसे आगे भी वैसी ही भूमिकाएं देनी चाहिए। ‘वह कॉमिक किरदार निभाने में बेहतर है तो उससे कॉमेडी ही करवाई जाए’ या ‘वह लंबा और विलेन जैसा दिखता है, इसलिए उसे विलेन बनाना ही ठीक रहेगा’ मुझे भी इसी प्रकार से किरदार मिलते थे।”

संजय खुद को विविध किरदार निभाने का मौका मिलने का श्रेय रजत कपूर के ‘आंखों देखी’ को देते हैं।

हास्य भूमिकाओं से दर्शकों को गुदगुदाने वाले संजय कहते हैं, “मुझे लगता है कि अगर आप खुद को अभिनेता कहते हैं तो आपका कैनवास काफी विस्तृत हो जाता है और अगर आप खुद को हास्य अभिनेता कहते हैं तो यह बेहद छोटा रह जाता है। अभिनेता कॉमेडी, एक्शन और सभी प्रकार के किरदार निभा सकता है।”

आगामी शुक्रवार को रिलीज होने वाली फिल्म ‘दिलवाले’ के बाद संजय ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’ और ‘बागी’ में दिखाई देंगे।

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