नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। रेल मंत्री सुरेश प्रभु गुरुवार को अपना पहला रेल बजट पेश करेंगे। संभावना जताई जा रही है कि राजनीतिक लोकलुभावनवाद की वजह से बदतर हालत में पहुंचे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क को पुन: उर्जान्वित करने के लिए वह कोई विशेष खाका पेश करेंगे।
वर्तमान रेल बजट इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि छह महीने पहले सत्ता में आई मोदी सरकार ने रेलवे की कुछ बड़ी परियोजनाओं में 100 फीसदी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी दी है। साथ ही वादा किया गया है कि यह 162 साल पुराने रेल नेटवर्क में एक नई जान फूंकेगा।
इस बजट की सबसे बड़ी बात यह है कि रेल किराया कम न करने का पहले ही एलान किया जा चुका है। एक सप्ताह पहले रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा, “रेल किराया कम नहीं हो सकता। यह पहले से ही कम है और सरकार सब्सिडी दे रही है।”
यह देखना दिलचस्प होगा कि पैसे उगाहने के लिए रेल मंत्रालय आखिर कौन सी तरकीब अपनाता है।
पिछले बजट में रेल यात्री किराये में 15 फीसदी, जबकि माल भाड़े में 6.5 फीसदी की वृद्धि की गई थी।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी के कारण डीजल के दाम में हुई कमी के मद्देनजर रेल मंत्री किराया घटाने के विचार को खारिज कर चुके हैं।
तेल की कीमतों में कमी से सब्सिडी पर खर्च होने वाले अरबों डॉलर की बचत हुई है, लेकिन वित्त मंत्री को राजकोषीय घाटे को रोकने की चिंता है, जो लक्षित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.6 फीसदी की सीमा को पार कर चुका है।
भारतीय रेलवे की अधिशेष भूमि पर एक विजन स्टेटमेंट भी बहुप्रतीक्षित है।
वर्तमान बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब भारतीय रेलवे की स्थिति बेहद बदतर हो चुकी है, जिसे ऑपरेटिंग अनुपात के रूप में मापा जाता है।
स्वतंत्र तौर पर कराए गए सर्वेक्षण के मुताबिक, 74 फीसदी लोग बेहतर सेवा के पक्षधर हैं और वे ज्यादा रेलगाड़ियां चलाने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं स्वच्छ भारत अभियान के बावजूद 78 फीसदी लोग रेलवे में गंदगी से परेशान हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा तथा पुराना रेल नेटवर्क है। यह रोजाना 2.3 करोड़ लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाता है और 20.65 लाख टन माल ढोता है।
भरतीय रेल कुल 7,172 रेलवे स्टेशनों पर अपनी सेवाएं प्रदान करता है। देश भर में कुल 12,617 यात्री रेलगाड़ियां और 7,421 मालगाड़ियां चलती हैं।
रेल बजट से एक दिन पहले बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में रेल का डिब्बा बनाने वाली कंपनी टेक्समेको रेल एंड इंजीनियरिंग के शेयर में 2.90 फीसदी की कमी दर्ज की गई। पहले के 143.35 रुपये की तुलना में यह 139.20 रुपये पर बंद हुआ।
डिब्बा बनाने वाली अन्य कंपनी जैसे टीटागढ़ वैगन्स के शेयर में 6.19 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
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