उन्होंने कहा कि समाजवादी हमेशा गरीब एवं अमीर बच्चों की समान शिक्षा के हिमायती रहे हैं। इसीलिए वर्तमान राज्य सरकार ने भी शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री रविवार को लोक भवन में विश्व बाल दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के कल्याण के लिए कई योजनाओं का लोकार्पण करने के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को यूनिफॉर्म एवं पुस्तकों के लिए प्रति छात्र 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की योजना की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने 10 बच्चों को प्रतीक के रूप में चेक वितरित किए।
इस योजना के तहत 17,000 से भी अधिक बच्चों को लाभ मिलेगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार द्वारा योजना पर आठ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन बच्चों की फीस पहले ही माफ हो चुकी है।
साथ ही मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ भी किया, जिस पर शिक्षा के अधिकार कानून के तहत दाखिला पाने वाले आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए उपलब्ध सीटें एवं राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं की जानकारी एक जनवरी, 2017 से मिल सकेगी।
अगले सत्र से इसी पोर्टल के माध्यम से इन बच्चों को प्रवेश देने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसी प्रकार कक्षा आठ तक के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को नि:शुल्क स्कूल बैग उपलब्ध कराने की योजना के तहत 10 छात्र-छात्राओं को प्रतीक के रूप में स्कूल बैग का वितरण भी मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।
उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बिना अतिरिक्त लागत के नवाचार को बढ़ावा देने वाले 30 सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को भी सम्मानित किया। इसके साथ ही, भारत अभ्युदय फाउंडेशन एवं प्रदेश सरकार द्वारा तैयार की गई ‘शिक्षा का अधिकार रिपोर्ट’ एवं श्री ऑरबिंदो सोसाइटी द्वारा तैयार की गई ‘वार्षिक नवाचार पुस्तिका’ का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के सभी विकसित राष्ट्रों ने सबसे पहले अपनी प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का काम किया। विकासशील अर्थव्यवस्था होने के नाते यहां शिक्षा के क्षेत्र में क्रमश: बुनियादी सुविधाओं को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर स्थानीय निवासियों एवं अध्यापकों के व्यक्तिगत प्रयासों से अभिनव प्रयोग किए गए। लेकिन अभी शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त सुविधाओं के लिए काफी प्रयास किया जाना बाकी है। शिक्षा व्यवस्था को अधिकारियों के मकड़जाल से मुक्त कराकर अध्यापकों को स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका दिया जाएगा।
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