नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। फ्रांस की कंपनी डीसीएनएस ने ‘द आस्ट्रलियन’ अखबार के खिलाफ आस्ट्रेलिया के सर्वोच्च न्यायालय पहुंची है। कंपनी भारत की स्कॉर्पीन पनडुब्बी परियोजना के लीक हुए दस्तावेज और प्रकाशित नहीं हों इसके लिए अदालत से रोक का आदेश चाहती है।
नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। फ्रांस की कंपनी डीसीएनएस ने ‘द आस्ट्रलियन’ अखबार के खिलाफ आस्ट्रेलिया के सर्वोच्च न्यायालय पहुंची है। कंपनी भारत की स्कॉर्पीन पनडुब्बी परियोजना के लीक हुए दस्तावेज और प्रकाशित नहीं हों इसके लिए अदालत से रोक का आदेश चाहती है।
डीसीएनएस के मीडिया रिलेशन के प्रमुख इमानुएल गॉडेज ने आईएएनएस के एक ईमेल के जवाब में कहा, “संक्षेप में कहें तो डीसीएनएस द आस्ट्रेलियन की वेबसाइट से उन दस्तावेजों को, जिन्हें प्रकाशित किया है उन्हें अपनी वेबसाइट से हटाने के लिए और अन्य दस्तावेजों का और प्रकाशन नहीं करने का निर्देश देने की मांग कर रही है।”
डीसीएनएस कंपनी अभी पनडुब्बी डाटा लीक प्रकरण से दुनिया में चर्चा के केंद्र में है। कंपनी आस्ट्रेलियाई प्रकाशक द आस्ट्रेलियन के किसी और गोपनीय सूचना प्रकाशित करने पर रोक चाहती है। इनमें 22 हजार 400 गोपनीय दस्तावेज हैं। ऐसा इसलिए कि इसका प्रकाशन उसके ग्राहक भारतीय नौसेना के नुकसान का कारण बन सकता है।
कंपनी अदालत से यह भी आदेश चाहती है कि ‘द आस्ट्रेलियन’ उसे दस्तावेज वापस करने पर मजबूर हो जाए और उन्हें अपनी वेबसाइट से हटाए।
डीसीएनएस के वकील जस्टिन मुनसी की ओर से शपथ पत्र में कहा गया है, “इस अत्यंत मूल्यवान दस्तावेज के प्रकाशन से डीसीएनएस और इसके ग्राहकों को नुकसान पहुंच रहा है। संवेदनशील एवं प्रतिबंधित सूचनाएं, तस्वीरों का प्रकाशन साख के सीधे नुकसान का कारण बना है।”
द आस्ट्रेलियन ने दस्तावेजों में से अत्यंत संवेदनशील ब्यौरे को प्रकाशन से पहले संपादित किया है।
इस बीच भारतीय नौसेना के शीर्ष अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि परियोजना में देरी होगी। पहली स्कॉर्पीन पनडुब्बी आईएनएस कावेरी का अभी समुद्री परीक्षण चल रहा है, उसे इस साल के अंत तक नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा।
भारतीय नौसेना ने कहा है कि लीक हुए दस्तावेजों से पनडुब्बी के रडार से बच निकलने की क्षमता प्रभावित नहीं होगी। एक अधिकारी ने आईएनएस को कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो भारत इस पनडुब्बी में उचित बदलाव करने में समर्थ है।
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