मुंबई, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। नौसेना प्रमुख सुनील लांबा ने शनिवार को कहा कि स्कॉर्पीन डेटा लीक मामले की प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि यह लीक भारत में नहीं, बल्कि फ्रांस में डीसीएनएस के कार्यालय से हुई थी।
भारत के नवीनतम युद्धपोत मोर्मुगाव के लांच के मौके पर लांबा ने कहा, “हमारे यहां एक उच्चस्तरीय समिति स्कॉर्पीन लीक की जांच कर रही है। इसी तरह फ्रांस में डीसीएनएस और फ्रांस की सरकार ने एक जांच शुरू की है। इस जांच के आधार पर हम देखेंगे कि क्या करना चाहिए। किसी शमन उपाय की जरूरत है या नहीं।”
आस्ट्रेलियाई समाचार पत्र ‘द आस्ट्रेलियन’ के अनुसार, फ्रांस की कंपनी डीसीएनएस से लीक हुए विवरण 22,400 पृष्ठों के हैं, जिनमें भारत के स्कॉर्पीन पनडुब्बी कार्यक्रम के महत्वपूर्ण विवरण शामिल हैं।
न्यू साउथ वेल्स की शीर्ष अदालत ने अपने एक आदेश में ‘द आस्ट्रेलियन’ को सारे दस्तावेज डीसीएनएस को सौंपने को कहा है।
भारत सरकार इस बात पर कायम है कि लीक से पनडुब्बी कार्यक्रम या पनडुब्बी की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
फ्रांस की रक्षा कंपनी डीसीएनएस के सहयोग से स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी का निर्माण मुंबई में हो रहा है।
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