वाशिंगटन, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। नरेंद्र मोदी सरकार का महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान मिस्र की एक ऐसी ही परियोजना से प्रेरित है, जिसकी जानकारी भारत के साथ साझा की गई थी। विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने यहां यह बात कही।
किम ने विश्व बैंक के एक कार्यक्रम में शुक्रवार को कहा था, “वैश्विक प्रथाओं के बारे में विभिन्न देशों के बीच ज्ञान के आदान-प्रादन के लिए बनाई गई हमारी नई संरचना अधिक सरल और प्रभावी है। जब भारत सरकार गरीबों के लिए स्वच्छता सेवाओं का विस्तार करने के लिए एक प्रमुख कार्यक्रम तैयार करने के लिए मदद हासिल करने के लिए बैंक के पास आई थी तो हमने उन्हें मिस्र के ग्रामीण स्वच्छता परियोजना से मिला ज्ञान और अनुभव हस्तांतरित किया।”
उन्होंने कहा, “यही कारण है कि भारत में एक अरब डॉलर की स्वच्छ भारत ग्रामीण स्वच्छता परियोजना लागू की गई, जिसमें नागरिकों को स्थानीय शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के क्षेत्रों में अच्छी सेवा प्रदान करने के लिए पहले से ही मिस्र बड़े पैमाने पर लागू की गई परियोजना का ज्ञान और अनुभव लिया गया।”
किम ने कहा कि बैंक इन दोनों परियोजनाओं का ज्ञान वैश्विक स्तर पर बेहतर परिणाम पाने के लिए साझा करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि विश्व बैंक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा दे रहा है।
भारत दुनिया में सड़कों के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है। लेकिन इसके दो फीसदी राष्ट्रीय राजमार्ग पर 40 फीसदी यातायात चलता है, जिससे जाम लगता है और उत्पादकता सीमित होती है, जिससे आर्थिक रफ्तार भी कम हो जाती है।
किम ने कहा, “अवसंरचना अर्थव्यवस्थाओं और सेवाओं के वितरण को एकीकृत करने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत की सड़कों को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम ने सिंगापुर स्थित फर्म कब हाइवेज में 25 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। इस फर्म को भारत में टोल राजमार्ग बनाने का कुछ ठेका मिला है। वह सड़क डेवलपर्स को अपनी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सबसे जरूरी चीज धन मुहैया करा रही है।”
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