नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के वर्ष 2018 तक 145 अरब डॉलर एवं वर्ष 2025 तक 280 अरब डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है, लेकिन देश में गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में अनेक प्रकार की चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।
हेल्थकेयर क्षेत्र की एक शीर्ष निकाय हेल्थकेयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (नैटहेल्थ) ने वार्षिक आयोजन ‘नेटइव 2016’ के दौरान नैटहेल्थ के महासचिव अंजन बोस ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के वर्ष 2018 तक 145 अरब डॉलर एवं वर्ष 2025 तक 280 अरब डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है। हालांकि भारत का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पिछले दशक में काफी उल्लेखनीय तरीके से विकसित हुआ है, लेकिन देश में गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में अनेक प्रकार की चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।”
बोस ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा पर कम खर्च, स्वास्थ्यसेवा से संबंधित अपर्याप्त आधारभूत संरचना एवं दोहरे रोगों का दबाव इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां हैं।”
नैटहेल्थ ने वार्षिक आयोजन ‘नेटइव 2016’ के दौरान यहां शुक्रवार को अस्पतालों के लिए कोड ऑफ एथिक्स को जारी किया। विश्वास की कमी एवं अनैतिक गतिविधियां स्वास्थ्य सेवा उद्योग की प्रमुख समस्याएं रही हैं जिससे निपटने के लिए नैटहेल्थ ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के सहयोग से ‘कोड ऑफ एथिक्स’ को भी विकसित किया है।
वहीं चिकित्सा उपकरण उद्योग के लिए मेक इन इंडिया प्रोग्राम को सकारात्मक बनाने हेतु सिफारिशों को तैयार करने के लिए नैटहेल्थ ने डेलोइट के साथ साझेदारी की है।
डेलोइट इंडिया की पार्टनर एवं लाइफ साइंसेज एंड हेल्थकेयर लीडर, चारु सहगल ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा के लिए बढ़ती हुई मांग एवं किफायती व पहुंच योग्य स्वास्थ्य उपलब्ध कराने में चिकित्सा उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह समय एक ऐसी प्रणाली को अपनाने के लिए उपयुक्त है, जो चिकित्सा उपकरणों को एक रणनीतिक चालक के रूप में इस्तेमाल करे।”
नैटहेल्थ के अध्यक्ष सुशोभन दासगुप्ता ने कहा, “वर्ष 2020 तक चिकित्सा उपकरण बाजार के 15 प्रतिशत की दर से बढ़ कर 8.6 अरब डॉलर तक पहुंच जाने की संभावना है। हालांकि, हमारा वर्तमान घरेलू चिकित्सा उपकरण बाजार वैश्विक बाजार के केवल 1 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन फिर भी भारत विश्व के शीर्ष 20 एवं एशिया के शीर्ष 4 (चीन, जापान, दक्षिण कोरिया के बाद) देशों में शुमार है।”
वहीं, बोस ने इस बात पर बल दिया, “स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विकास के लिए चिकित्सा उपकरणों की महत्ता एवं चिकित्सा उपकरण निमार्ताओं द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों को देखते हुए चिकित्सा उपकरणों के हितधारकों एवं व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए यह आवयक हो गया है कि वह सरकार से रचनात्मक सहयोग करे एवं चिकित्सा उपकरण उद्योग के लिए निर्धारित ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम से कदमताल मिलाए।”
नैटहेल्थ-डेलोइट ने सरकार से चिकित्सा उपकरणों के निर्माण को प्रोत्साहित करने की सिफारिश करते हुए कहा है कि चिकित्सा उपकरणों के लिए कच्चे माल पर सेनवैट/ड्यूटी क्रेडिट उपलब्ध कराया जाए, शुल्क में छूट, आयातित उपकरणों के साथ वैट पैरिटी, गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए एफडीए अथवा एफडीए के समकक्ष प्रमाणन की व्यवस्था की जाए।
अपोलो हॉस्पिटल्स की उपाध्यक्ष एवं नैटहेल्थ में कोड ऑफ एथिक्स की विजेता प्रीता रेड्डी ने कहा, “निजी क्षेत्र ने देश में गुणवत्ता के मानदंडों को स्थापित करने के लिए सरकार के साथ मिल कर कार्य किया है एवं अब वह समय आ गया है जब निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को अपने तौर-तरीके को बदलने की आवश्यकता है।”
आईएमए के मानद महासचिव डॉ. के.के. अग्रवाल ने यह स्पष्ट किया, “यह कोड सदस्यों को अपने आचरण एवं रोगी/अंतिम उपयोक्ता के साथ इंटरैक्शन एवं अन्य हितधारकों के साथ पेश आने के तौर-तरीकों के विषय में दिशा-निर्देशन प्रदान करता है। इससे उनकी दैनिक गतिविधियों, प्रयासों एवं इंटरैक्शन में नैतिकता, सदाचार एवं ईमानदारी का समावेश होगा और वे कानून के दायरे में रह कर भारत में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में विकास एवं रोगी सेवा में सुधार को अंजाम दे सकेंगे।”
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