स्विस निर्देशक भारतीय साधु पर फिल्म बनाने को उत्सुक

धर्मशाला, 6 नवंबर (आईएएनएस)। स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्देशक स्टेफी गिराकुनी भारतीय साधु की जीवनशैली से प्रभावित होकर एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री फिल्म) बनाना चाहती हैं। इससे पहले वह भारत यात्रा के दौरान अमेरिका में जन्मी 86 वर्षीय एक वास्तुकार दीदी कांट्रैक्टर पर ‘दीदी कांट्रैक्टर मैरिंग द अर्थ टू द बिल्डिंग’ वृत्तचित्र बना चुकी हैं।

धर्मशाला, 6 नवंबर (आईएएनएस)। स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्देशक स्टेफी गिराकुनी भारतीय साधु की जीवनशैली से प्रभावित होकर एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री फिल्म) बनाना चाहती हैं। इससे पहले वह भारत यात्रा के दौरान अमेरिका में जन्मी 86 वर्षीय एक वास्तुकार दीदी कांट्रैक्टर पर ‘दीदी कांट्रैक्टर मैरिंग द अर्थ टू द बिल्डिंग’ वृत्तचित्र बना चुकी हैं।

‘नेलकन्फरेईश’ और ‘स्विचेनकॉमेन अंड गेहन’ जैसे वृत्तचित्रों का निर्माण कर चुकीं स्टेफी 12 साल पहले ट्रेकिंग के लिए भारत आई थीं।

स्टेफी के मुताबिक, “मैं 12 साल पहले संयोगवश भारत आई थी। मेरी यात्रा का अंतिम पड़ाव धर्मशाला का एक क्लीनिक था। वह पहला घर था, जिसे वह (दीदी) बना रही थीं। मैं वहां एक महीने रही। मैं पहली बार एक मिट्टी के घर में रही। इसने मुझे वास्तव में प्रभावित किया।”

पांचवें धर्मशाला अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान स्टेफी ने आईएएनएस को बताया कि दीदी भी उसी गांव में रह रही थीं और उन्होंने (स्टेफी) क्लीनिक और गांव के लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर वृत्तचित्र बनाना शुरू कर दिया। फिल्मकार ने बताया कि दीदी पर बने वृत्तचित्र के प्रोडक्शन का काम हाल ही में खत्म हुआ है।

सिर्फ दीदी ने ही नहीं, बल्कि एक साधु ने भी उन्हें प्रभावित किया और अब वह साधु पर वृत्तचित्र फिल्म बनाना चाहती हैं।

स्टेफी के अनुसार, “वास्तव में मैं एक साधु पर फिल्म बनाने का विचार कर रही हूं, उनसे मैं धर्मशाला में मिली थीं, लेकिन वह दक्षिण भारत के हैं। मैं एक निश्चित समय अवधि में उनसे दो बार मिल चुकी हूं।”

‘दीदी कांट्रैक्टर’ के निर्माण के लिए उनकी टीम में यूरोप और भारतीय दोनों देशों के सदस्य थे।

भारतीय कलाकारों व सितारों के साथ काम करने में स्टेफी को कोई दिलचस्पी नहीं है। उनका कहना है कि वह डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर हैं। वह फीचर फिल्म से नहीं जुड़ना चाहतीं, क्योंकि इसमें उन्होंेने हाथ आजमाया था, लेकिन बात नहीं बनी। वह वास्तव में कलाकारों के साथ काम नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि वह यहां के फिल्मकारों को जानती हैं, लेकिन कलाकारों को नहीं जानती हैं।

फिल्मकार का कहना है कि भारत में वह काम करना पसंद करेंगी। इस देश में उनका अनुभव शानदार रहा है।

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