लखनऊ, 11 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, देश के पूर्व रक्षामंत्री व समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का कहना है कि पहले के नेता अच्छी राय और अच्छे संदेश देते थे, लेकिन अब वैसी बात राजनीति में नहीं रह गई है। सब चापलूस हो गए हैं, उनकी पार्टी में भी चापलूसों की कमी नहीं है।
मुलायम ने कहा, “पहले हमारे यहां आलोचना करने वालों का सम्मान था, हम उनसे बात कर अपने में सुधार करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होता।”
सोमवार को लखनऊ के कुकरैल वनक्षेत्र में पौधे रोपकर यूपी में 24 घंटे में पांच करोड़ पौधे लगाने के विश्व रिकार्ड बनाने संबंधी अभियान की शुरुआत करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए मुलायम ने कहा कि गांव वाले अनपढ़ थे तो भी पेड़ लगाते थे और चारों ओर हरा-भरा रहता था, लेकिन अब पढ़े-लिखों की संख्या काफी हो गई है, मगर ये पढ़े-लिखे लोग पेड़ नहीं लगाते।
सपा प्रमुख ने कहा कि हालत यह हो गई है कि आजादी के समय जितने पेड़-पौधे हुआ करते थे, उतने अब नहीं बचे। हर खेत की मेड़ पर कम से कम दो पेड़ हुआ करते थे। पेड़ों की कमी के कारण प्रदूषण बढ़ा है और इसी से बीमारियां भी काफी बढ़ी हैं।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर विकास कार्य हुए हैं, पर नेता और अधिकारी इसका प्रचार-प्रसार नहीं कर रहे।
सपा प्रमुख ने नेताओं व अधिकारियों से अपील की कि वे अखिलेश सरकार के कामों का प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल में कराए कार्यों के बारे में मुझे बताते रहते हैं।
उन्होंने कहा, “ऐसे में मैंने उनसे पूछ लिया कि पेड़ कितने लगवाए, तब से उन्होंने इस ओर भी ध्यान देना शुरू किया। वे इसी क्षेत्र के इंजीनियर हैं और इसकी क्या महत्ता है, वे अच्छी तरह से समझते हैं।”
सपा प्रमुख ने पांच करोड़ पौधे लगाकर नया विश्व रिकार्ड बनाने के लिए प्रदेश को बधाई देते हुए लोगों से अपील की कि वे आठ से 12 फुट की ऊंचाई के पौधे लगाएं, क्योंकि बड़ा पौधा बहुत कम मरता है।
इस अवसर पर सपा सरकार के मंत्री अहमद हसन व रविदास मेहरोत्रा, कृषि उत्पादन आक्युत प्रवीर कुमार तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
मुलायम ने अभियान के तहत लगने वाले पेड़ों की मॉनिटरिंग का जिम्मा मुख्यमंत्री की प्रमुख सचिव अनीता सिंह को सौंपा।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से ही कहा कि अनीता समय-समय पर इस अभियान के तहत लगाए गए पौधों की मॉनिटरिंग करें। मसलन, जितने पौधे लगे, उनमें से कितने जीवित बचे और कितने मर गए। मरने वाले पौधों की जगह नए पौधे लगे या नहीं, इन सबका ध्यान रखना है।
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