मंगलवार को विधानसभा में कांग्रेस से पाटन विधायक व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल और सिंचाई सचिव गणेश शंकर मिश्रा के बीच बहस हुई थी। बुधवार को प्रश्नकाल के बीच भूपेश बघेल ने उक्त मुद्दे को उठाया।
उन्होंने कहा, “सरकार ने अधिकारियों को खुली छूट दे रखी है। अधिकारी विधायकों की बातों में हस्तक्षेप देने लगे हैं। जब सवाल पूछते हैं तो अधिकारी सदन में ही हमें धमकाते हैं। हम पर दबाव बनाते हैं। ऐसे में हम सवाल कैसे पूछेंगे?”
विपक्ष ने प्रश्नकाल के बीच अपने विधायक के साथ विधानसभा में हुए दुर्व्यवहार का मामला उठाया। कांग्रेस ने प्रश्नकाल नहीं चलने दिया तथा अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर ने खड़े होकर कहा, “कांग्रेस की विशेषाधिकार हनन की सूचना मिली है। प्रत्येक विधायक का सम्मान जरूरी है। संबंधित अधिकारी से बातचीत कर निर्णय लिया जाएगा।” लेकिन विपक्ष ने एक न सुनी और सदन से बहिर्गमन कर गए।
सरकार की तरफ से मंत्री व भिलाईनगर से विधायक प्रेमप्रकाश पांडेय ने विपक्ष को आश्वासन देते हुए कहा कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सदस्यों के मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन भूपेश नहीं माने और कहा, “इस मामले को लेकर न तो संसदीय सचिव का फोन आया और न ही सत्ता पक्ष के किसी मंत्री का। जब तक सरकार की तरफ से ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता कांग्रेस शांत नहीं रहेगी।”
कांग्रेस के विधायक सदन में शोर-शराबा कर कार्रवाई की मांग करते रहे। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन विशेषाधिकार हनन के लिए सजग है। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि इससे पहले भी सरकार की तरफ से आश्वासन दिया गया, उसका क्या? इस पर प्रेमप्रकाश पांडेय ने कहा कि सरकार की तरफ से जो कहा जाता है वह कुछ हल्का नहीं होता।
शोर-शराबे के बीच मंत्री अजय चंद्राकर खड़े हुए और उन्होंने विपक्ष से कहा कि प्रश्नकाल के बीच मुद्दा उठाना क्या उचित है? इन सबके बीच विपक्ष सदन से बहिर्गमन कर गए।
विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष को फिर सदन की कार्यवाही में शामिल होने को कहा। दोबारा प्रश्नकाल प्रारंभ होने पर अध्यक्ष ने कहा कि संबंधित से जवाब मांगा जाएगा। जवाब आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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