लखनऊ, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि चिकित्सा के क्षेत्र में शहरों में तो खूब काम हुआ है, लेकिन आजादी के इतने साल के बाद भी हम गांवों में डॉक्टर नहीं पहुंचा पाए हैं।
उन्होंने कहा, “जब हम विपक्ष में थे तो सरकार से ये सवाल करते थे। आज हम सरकार में हैं तो ये सवाल हमसे पूछा जा रहा है।”
मुख्यमंत्री सोमवार को किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू) में कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल के विस्तार समेत कई योजनाओं का शिलान्यास करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।
चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “हमने तो इतना काम कर दिया है कि सरकार जब केजीएमयू का नाम बदलेगी तो मेरे पास ही दौड़े आओगे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के मुकाबले तीन गुना काम उनकी सरकार के कार्यकाल में हुआ है। बीते इन चार सालों में खासकर चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम हुआ है।
अखिलेश ने कहा, “इससे पहले केजीएमयू में आया था तो मुद्दा उठा था कि केजीएमयू के डाक्टरों का वेतन पीजीआई के समान हो जाना चाहिए। अबकी बार आया हूं तो कर्मचारियों के वेतन पीजीआई के बराबर करने की बात कही जा रही है।”
उन्होंने कहा कि हालांकि केजीएमयू प्रशासन ने बजट से पहले बुला लिया होता तो अब तक कर्मचारियों को लाभ मिल रहा होता। सरकार की ओर से कर्मचारियों पीजीआई के समकक्ष करने की कोशिश की जाएगी। “नहीं तो कल कोई दूसरा आ गया तो फिर आप हमारे पास ही आएंगे।”
प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) अनूप चंद्र पांडेय ने कहा कि पिछले चार सालों में सपा सरकार ने प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। साल 2012 में एमबीबीएस की 1140 सीटें थीं, जो 4 सालों में बढ़कर 1740 हो गई हैं। इसमें 100 सीटें बांदा और 400 सीटें ग्रेटर नोएडा और बदायूं मेडिकल कॉलेज के लिए हैं।
उन्होंने बताया कि आजादी के 50 साल बाद प्रदेश में मात्र 8 मेडिकल कॉलेज की स्थापना हो पाई, जबकि केवल चार वर्षों में इनकी संख्या 16 हो गई हैं। अगले वर्ष 11 और मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य है। वहीं अगले वर्ष एमबीबीएस की सीटों की संख्या 3000 के करीब हो जाएगी।
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