हरियाणा सरकार ने जाट आंदोलन के दौरान दुष्कर्म की बात कबूली

चंडीगढ़, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। हरियाणा में जाटों के हिंसक आंदोलन के दौरान महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाओं को पूरी तरह नकारने वाली हरियाणा सरकार ने सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष स्वीकार किया कि आंदोलन के दौरान इस तरह की घटनाओं की संभावना हो सकती है।

उच्च न्यायालय द्वारा एक मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने यह स्वीकारोक्ति की।

हरियाणा की पुलिस महानिरीक्षक, दक्षिणी रेंज-सह-प्रभार, विशेष जांच दल (एसआईटी), ममता सिंह द्वारा दायर एक हलफनामे पर एक रपट सौंपते हुए राज्य पुलिस ने हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-1 पर घटी घटना के संबंध में 30 मार्च को दर्ज प्राथमिकी संख्या 118 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376-डी के तहत दुष्कर्म का मामला शामिल किया है।

प्राथमिकी में दुष्कर्म की धारा दिल्ली निवासी बॉबी जोशी की शिकायत के आधार पर लगाई गई है, जिनके मुताबिक आंदोलनकारियों ने कथित तौर पर उनके साथ दुष्कर्म किया था। राज्य सरकार ने कहा कि उसके पास कुछ गुमनाम पत्र आए, जिसमें वहां दुष्कर्म की बात कही गई है।

उल्लेखनीय है कि इस साल फरवरी में हरियाणा सरकार ने उच्च न्यायालय में जोर देकर कहा था कि जाटों के आंदोलन के दौरान सोनीपत जिले में दुष्कर्म या छेड़छाड़ जैसी कोई घटना नहीं घटी थी। सरकार ने इस संबंध में उच्च न्यायालय में एक स्थिति रपट सौंपी थी।

कई महिलाओं के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोप के बाद हरियाणा सरकार द्वारा गठित एक एसआईटी ने जांच के बाद प्रारंभिक स्थिति रपट सौंपी थी। इस दल में सभी अधिकारी महिलाएं थीं। एसआईटी की इस रपट में कहा गया कि कथित सामूहिक दुष्कर्म या छेड़छाड़ की शिकायत करने कोई महिला सामने नहीं आई।

दरअसल, मीडिया में आई सामूहिक दुष्कर्म की घटना की खबरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार व पुलिस को एक स्थिति रपट सौंपने को कहा था।

वकील अनुपम गुप्ता को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया गया।

उच्च न्यायालय ने सोमवार को मनोहर लाल खट्टर सरकार से जाट हिंसा की घटनाओं को देखने के लिए प्रकाश सिंह कमेटी की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाया और इसके संवैधानिक व कानूनी स्थिति को स्पष्ट करने को कहा।

उल्लेखनीय है कि सरकारी नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर नौ दिन चले जाट आंदोलन के दौरान कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 320 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

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