श्रीअखण्ड पाठ साहिब जी की समाप्ति के पश्चात पंज प्यारों की अगुवाई में समूह साध संगत द्वारा श्री गुरुग्रन्थ साहिब जी की शाही सवारी को शबद कीर्तन गायन करते हुए गुरुद्वारा नाका हिण्डोला से बांसमण्डी होते हुए बाल संग्रहालय चारबाग में सजे पंडाल में ले जाया गया। बाल संग्रहालय का भव्य पंडाल बहुत खूबसूरती से सजाया गया था, जिसमें फूलों से सुसज्जित भव्य स्टेज पर श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का प्रकाश किया गया।
रागी जत्था भाई राजिन्दर सिंह जी हजूरी रागी गुरूद्वारा नाका हिण्डोला द्वारा पवित्र आसा-दी-वार का अमृतमयी कीर्तन से कार्यक्रम आरम्भ हुआ। बहुत सुबह से ही लखनऊ एवं आस-पास के इलाकों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाल संग्रहालय लॉन चारबाग में पहुंचने लगे तथा पक्तियों में खड़े होकर श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के दर्शन के पश्चात अपना स्थान ग्रहण कर गुरूबाणी का रसपान किया।
भाई जरनैल सिंह जी हजूरी रागी श्री दरबार साहिब श्री अमृतसर वालों ने शबद कीर्तन गायन कर संगतों को मन्त्रमुग्ध कर दिया। ज्ञानी रोहतास सिंह जी दिल्ली वालों ने गुरमत विचारों द्वारा कथा व्याख्यान किया। गुरूमत संगीत एकेडमी के बच्चों एवं माता गुजरी सत्संग सभा, लखनऊ की सदस्याओं ने भी इस कार्यक्रम में शबद कीर्तन गायन किया। बाल संग्रहालय लॉन में दिन भर गुरबाणी कीर्तन तथा गुरमत विचारों का कार्यक्रम चला जिसका संचालन कृपाल सिंह ऐबट एवं सतपाल सिंह मीत ने किया।
लंगर पकाने की सेवा गुरजीत सिंह छाबड़ा एवं हरमिन्दर सिंह टीटू की देख रेख में हुई। समागम में लंगर के वितरण की सेवा सिख यंग मेन्स एसोसियेशन एवं दशमेश सेवा सोसाइटी द्वारा की गयी। कई स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संगत की सेवा के लिये आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, ब्रेड, छोले, जलेबी आदि अनेक तरह के व्यंजनों की सेवा निशुल्क स्टाल लगाकर की गई जहां लोगों ने खूब लंगर छका।
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