नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। हस्तशिल्प, बेंत (केन) एवं बांस, कृत्रिम आभूषण, कपड़ा (हस्त मुद्रित, हस्त कढ़ाई), गुड़िया एवं खिलौनों, पत्थर पर नक्काशी, फुटवियर इत्यादि के क्षेत्र में क्लस्टर स्तर पर उच्च कीमतों एवं गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देकर अनुसूचित जातियों के कारीगरों एवं उनके परिवारों की सहायता करने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी) और कपड़ा मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुआ है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की मौजूदगी में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों मंत्रालयों, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के कार्यालय और एनएसएफडीसी के वरिष्ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर मौजूद थे।
कृषि क्षेत्र के बाद हस्तशिल्प क्षेत्र को ही दूसरी सर्वाधिक आर्थिक गतिविधि माना जाता है। देश में अनुसूचित जातियों के लगभग 12 लाख कारीगर हैं। अनुसूचित जातियों के ज्यादातर कारीगर विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों के उत्पादन में संलग्न हैं। असम के बेंत एवं बांस, गुजरात एवं पंजाब के वस्त्र (हस्त मुद्रित), उत्तर प्रदेश के धातुओं के बर्तन, कर्नाटक के गुड़िया एवं खिलौने, आंध्र प्रदेश के रंगमंच संबंधी वेशभूषा एवं कठपुतलियां इसमें शामिल हैं।
यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अनुसूचित जातियों के कारीगरों को विपणन संबंधी सहायता मुहैया कराने के लिए दोनों पक्षों द्वारा प्रदर्शनियां/मेले आयोजित किए जाएंगे, ताकि उनकी कमाई बढ़ सके। दोनों ही पक्ष क्लस्टरों में कार्यरत अनुसूचित जातियों के कारीगरों के कौशल के उन्नयन के लिए प्रासंगिक कौशल विकास कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे और इसके साथ ही वे अपने ज्ञान एवं अनुभवों को साझा करेंगे। इन प्रयासों से देश भर में कार्यरत अनुसूचित जातियों के कारीगरों/उद्यमियों को विपणन संबंधी संपर्क हासिल होंगे।
dharmpath.com dharmpath