एनजीटी के इस सख्त रुख के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार ‘बैकफुट’ पर है। एनजीटी ने यह नोटिस एक व्यक्ति के आवेदन पर दिया है।
आवेदन में कहा गया है कि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद व नोएडा आदि स्थानों पर हिंडन नदी में इंडस्ट्रियल नालों के अलावा सॉलिड वेस्ट डाली जाती है। इसके साथ ही नगर निगम व ग्राम पंचायतों को भी नदी को प्रदूषित करने पर कटघरे में खड़ा किया गया है।
वहीं, शहर से लेकर गांवों तक के कूड़ा हिंडन में डाले जाने का हवाला देते हुए उसके प्रदूषण पर चिंता जताई गई है। इस बार एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को नोटिस जारी किया गया।
अब इस मामले में एक जुलाई को प्रतिवादी पक्ष को अपना पक्ष रखना होगा, जिसका जवाब तैयार करने के लिए खलबली मची हुई है, वहीं एनजीटी के इस रुख के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के भी नदी को प्रदूषण मुक्त करने के प्रयास के दावों पर सवाल उठ गया है।
उल्लेखनीय है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार समेत कई विभागों को हिंडन के प्रदूषण पर नोटिस जारी कर चुका है।
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