हिंदी के प्रोत्साह के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं : चक्रधर

भोपाल, 11 सितंबर (आईएएनएस)। प्रसिद्ध हास्य कवि प्रो़ अशोक चक्रधर ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी में हिंदी के उपयोग को प्रोत्साहित करने में केवल भावुकता से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से बात बनेगी।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रहे दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन में दूसरे दिन शुक्रवार को ‘संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी में हिंदी’ सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो़ चक्रधर ने कहा कि भारत सरकार के सी-डेक, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, विभिन्न कम्प्यूटर कम्पनियां एवं जागरूक लोगों ने कम्प्यूटर में हिंदी का उपयोग बढ़ाने के लिए कई सॉफ्टवेयर, एप्स, इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड उपलब्ध करवाए हैं। इनका अधिक से अधिक उपयोग करने से हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं का उपयोग कम्प्यूटर में बढ़ेगा।

भारत कोश पोर्टल के निर्माता आदित्य कुमार ने बताया कि कम्प्यूटर को भारतीय लोगों के उपयोग के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने बताया कि भारत कोश पोर्टल में लोगों के उपयोग के लिए 31 हजार लेख, लगभग 12 हजार चित्र एवं डेढ़ लाख पेज की सामग्री हिंदी में उपलब्ध है।

कम्प्यूटर विशेषज्ञ बालेंदु शर्मा ने बताया कि इंटरनेट की नई तकनीक से रोजगार के नए-नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। कम्प्यूटर के उपयोग में हिंदी की मांग पैदा करने से शासकीय विभाग के साथ निजी कम्पनियां नए-नए सॉफ्टवेयर एवं नई तकनीक लाएंगी। इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

कम्प्यूटर विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी में हिंदी के उपयोग को बढ़ाने के लिए उसकी भाषा एवं उच्चारण पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कम्प्यूटर में हिंदी के उपयोग को प्रोत्साहित करने वाले प्रो़ सूरजभान सिंह के योगदान का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि ‘लीला’ देश का हिंदी का सबसे अच्छा सॉफ्टवेयर है। इसमें विदेशी भाषाओं को ध्यान में रखकर सुधार करने होंगे।

सत्र में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. स्वर्णलता, सी-डेक के एम़ डी़ कुलकर्णी एवं राजभाषा विकास विभाग के केवल कृष्ण ने कम्प्यूटर में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में तैयार किए गए विभिन्न सॉफ्टवेयर, इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड आदि के बारे में जानकारी दी।

इस अवसर पर विदेश राज्यमंत्री जनरल वी़ क़े सिंह, वरिष्ठ टीवी पत्रकार राहुल देव, कम्प्यूटर विशेषज्ञ डॉ. संजय लेले, हर्ष कुमार, सत्र संयोजक डॉ. रचना विमल तथा देश-विदेश से आए हिंदी प्रेमी उपस्थित थे।

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