नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस से किशोर न्याय बोर्ड के आदेश को चुनौती देने वाली नाबालिग की याचिका पर जवाब देने के लिए कहा है। बोर्ड ने अपने आदेश में कहा है कि नाबालिग पर बालिग के समान मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उस पर अपनी कार से सिद्धार्थ शर्मा नाम के एक व्यक्ति को कुचलने और फिर मौके से फरार होने का आरोप है। इस घटना में शर्मा की मौत हो गई।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विमल कुमार यादव ने नाबालिग की याचिका पर पुलिस से जबाव देने को कहा और मामले की अगली सुनवाई के लिए दो जुलाई की तिथि निश्चित की।
नाबालिग आरोपी ने गुरुवार को सत्र न्यायालय के समक्ष बोर्ड के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि कथित अपराध संगीन अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
आरोपी के वकील राजीव मोहन तथा अभिमन्यु कंपानी ने कहा कि किशोर के खिलाफ मुकदमा भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए (लापरवाही के कारण मौत) के तहत चलाया जाना चाहिए, न कि धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत।
संशोधित किशोर न्याय अधिनियम के तहत मुकदमे की सुनवाई के पहले दिन बोर्ड ने शनिवार को आदेश दिया था कि नाबालिग आरोपी पर बालिग की तरह मुकदमा चलेगा। इस क्रम में पुलिस की याचिका मंजूर कर ली गई थी। घटना के वक्त आरोपी की उम्र 18 साल से कुछ ही दिन कम थी और अपराध संगीन की श्रेणी में आता है।
उल्लेखनीय है कि उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में चार अप्रैल की शाम किशोर काफी तेज गति से अपनी कार चला रहा था, जिस दौरान उसकी गाड़ी के नीचे आकर सिद्धार्थ शर्मा की मौत हो गई।
उल्लेखनीय है कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल व सुरक्षा) संशोधन अधिनियम, 2015 संगीन अपराधों जैसे हत्या व दुष्कर्म के मामले में 16 साल या इससे अधिक आयु के किशोर पर बालिग की तरह ही मुकदमा चलाने की मंजूरी देता है।
पुलिस ने 26 मई को आरोप-पत्र दाखिल किया, जिसमें उसने किशोर को गैर इरादतन हत्या के तहत आरोपित किया, जिसमें अधिकतम 10 साल जेल की सजा हो सकती है।
शर्मा की मौत के एक दिन बाद ही नाबालिग आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
नाबालिग को जमानत पर छोड़ दिया गया था, क्योंकि उसके खिलाफ लापरवाही से मौत का मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में पुलिस ने उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया।
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