शिमला, 16 मार्च (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बड़े पैमाने पर ऑक्सीटॉक्सिन नामक दवा के दुरुपयोग के लिए केंद्र और राज्य सरकार को फ टकार लगाई। अदालत ने दुरुपयोग होने वाली दवाओं के उत्पादन, आयात और वितरण को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया।
अदालत का मनना है कि डेयरी, कृषि और बागवानी में बड़े पैमाने पर ऑक्सीटॉक्सिन नामक दवा का दुरुपयोग होता है। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी इसे रोकने या नियंत्रित करने में पूर्णत: विफल रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और तरलोक सिंह चौहान की पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए मवेशियों के लिए बनी इस दवा का दुरुपयोग रोकने के लिए पुलिस को कड़ी कार्रवाई करने और मुकदमा दर्ज करने का आदेश किया।
अदालत ने इस आशय की मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका मानते हुए संज्ञान लिया और केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर दवा नियंत्रक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए एक प्रशिक्षण अकादमी स्थापित करने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय की पीठ ने राज्य सरकार को भी ऑक्सीटॉक्सिन दवा के परीक्षण के लिए सोलन जिले में स्थित कंडाघाट प्रयोगशाला में तीन महीने के भीतर समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि प्रतिबंधित या नियमित दवाओं की खुले बाजार में बिक्री बंद करने के लिए तीन महीने के भीतर राज्य के प्रत्येक जिले में एक कार्य दल का गठन होना चाहिए।
अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह दूध और सब्जियों के क्रम रहित नमूने का संग्रहण भी सुनिश्चित कराए ताकि जांच में अगर ऑक्सीटॉक्सिन पॉजिटिव पाया जाता है तो अभियोग चलाया जा सके।
उच्च न्यायालय ने अपने 14 पृष्ठ के फैसले में पुलिस को निर्देश दिया कि मवेशियों से अधिक दूध लेने के लिए ऑक्सीटॉक्सिन के इस्तेमाल करने वाले सभी दोषियों के खिलाफ पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम 1960 के तहत मामला दर्ज करे।
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