हिमाचल में फल-फूल रहा मत्स्य पालन उद्योग

शिमला, 24 नवंबर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश में सरकार की लगातार कोशिशों से मत्स्य पालन उद्योग फल-फूल रहा है। यह बात मंगलवार को यहां एक अधिकारी ने कही।

शिमला, 24 नवंबर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश में सरकार की लगातार कोशिशों से मत्स्य पालन उद्योग फल-फूल रहा है। यह बात मंगलवार को यहां एक अधिकारी ने कही।

मत्स्य विभाग के एक प्रवक्ता ने आईएएनएस से कहा, “मत्स्य उद्योग से न सिर्फ मछुआरों को आजीविका मिल रही है, बल्कि इससे सरकार की आय भी बढ़ रही है।”

उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं से मछली उत्पादन तो बढ़ा ही है, स्वरोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

गत तीन साल में राज्य में करीब 20 लाख रुपये मूल्य की 21,793 टन मछली का उत्पादन हुआ है।

रेनबो ट्राउट फार्मिग प्रौद्योगिकी के सफल कार्यान्वयन के कारण कुल्लू, शिमला, मंडी, कांगड़ा, किन्नौर और चंबा जिलों में 362 ट्राउट इकाइयों की स्थापना हुई है।

फिश फार्मिग डेवलपमेंट एजेंसी कार्यक्रम के तहत मत्स्य पालन में 30.46 हेक्टेयर क्षेत्र जोड़े गए और 29.50 हेक्टेयर पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया।

राज्य में एक नई योजना ‘मोबाइल फिश मार्केट’ लांच की गई है, जिसके तहत उपभोक्ताओं को ताजा मछली उपलब्ध कराने के लिए चार मोबाइल मछली विपणन वाहन खरीदे गए हैं।

राज्य के ऊपरी इलाकों में व्यास, सतलुज और रावी नदियों में भूरे और इंद्रधनुषी रंग की ट्राउट मछलियां पाई जाती हैं।

ट्राउट मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए चंबा जिले के भरमौर में चार करोड़ रुपये की लागत से एक ट्राउट फार्म स्थापित किया जा रहा है। साथ ही चंबा में 40 लाख रुपये की लागत से एक एक्वे रियम भवन-सह-संग्रहालय भी स्थापित किया जा रहा है।

सोलन और उना जिलों में भी आठ करोड़ रुपये की लागत से कार्प फार्मो का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने 80 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली का तालाब और 20 हेक्टेयर क्षेत्र में नर्सरी तालाब बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

राज्य में लोगों को मत्स्य पालन के लिए तालाब बनाने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जा रही है।

राज्य में मुख्य रूप से ट्राउट, मशीर, बारिलुस और ग्लाईप्टोथोरैक्स प्रजाति की मछलियां पाई जाती हैं।

इसके अलावा हंगेरियन कॉमन कार्प और अमूर कॉमन कार्प प्रजाति की मछलियां बाहर से भी मंगवाई गई हैं।

शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कृषि-आर्थिक शोध केंद्र के एक अध्ययन के मुताबिक, राज्य में एक छोटे मछली फार्म में सालाना 900 किलोग्राम और बड़े फार्म में 3,400 किलोग्राम मछली का उत्पादन होता है।

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