हिमाचल में सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर डलहौजी स्कूल चर्चा में

धर्मशाला, 8 जून (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत हिल स्टेशन डलहौजी के पास मिनी स्विट्जरलैंड के रूप में प्रसिद्ध खज्जिआर पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र माना जाता रहा है। डलहौजी और इसके आसपास मौजूद आकर्षण के कई केंद्रों में अब डलहौजी पब्लिक स्कूल का नाम भी जुड़ गया है।

डलहौजी स्कूल के चर्चा में आने की वजह यहां लगाया गया 108 फीट ऊंचा राष्ट्रीय झंडा है। इसे हिमाचल का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज बताया गया है।

तिरंगे की पृष्ठभूमि में धौलाधार पर्वत श्रृंखला दिखाई पड़ती है। यह झंडा इस स्कूल में आकर्षण के अन्य केंद्र मिग 21 लड़ाकू विमान, सतह से हवा में मार करने वाला पिचोरा प्रक्षेपास्त्र और टी-55 युद्धक टैंक के साथ शान से खड़ा है।

स्कूल के अधिकारियों ने कहा कि पर्यटन के मौसम में करीब 25000 हजार पर्यटक प्रति माह यहां आते हैं।

स्कूल के प्रधानाध्यापक जी. एस. ढिल्लों ने कहा, “यह तिरंगा समुद्र तल से 7000 फीट की उंचाई पर स्थापित है। आकार में यह हिमाचल प्रदेश का सबसे ऊंची संरचना है। यह पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ छात्रों और युवाओं में गर्व की भावना भी उत्पन्न करता है।”

प्रधानाध्यापक ने कहा, “हमने इसे भारत के फ्लैग फउंडेशन से प्राप्त किया है। इस झंडे का वजन 8.5 किलोग्राम है और परिमाप 20 गुना 30 फीट है। इसके खंभे का वजन 1500 किलोग्राम है। यह रात में प्रति 400 किलोवाट क्षमता के दो मेटल-हेलाइड बल्ब से प्रकाशित रहता है। इस झंडे को शहर और इसके आसपास के इलाकों से भी देखा जा सकता है।”

ढिल्लों ने कहा कि इस खंभे को तीन भाग में सड़क मार्ग से लाया गया था। यह काफी लचीला और जस्ती इस्पात से बना है। यह 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की हवा का वेग सहन कर सकता है और इसकी लोच क्षमता एक फीट तक है।

उन्होंने कहा कि इस झंडे का संचालन रिमोट कंट्रोल से होता है और झंडे को पकड़ कर रखने वाले स्टील के तारों का निर्माण इस तरह से किया गया है कि कोई भी व्यक्ति इसका संचालन आसानी से कर सकता है।

उन्होंने कहा, ” इस गर्मी के मौसम में प्रति माह 25000 पर्यटक यहां आते हैं जिनमें मुख्यत: युवा शामिल होते हैं। हमें उम्मीद है कि इस मौसम में यह संख्या बढ़ कर एक लाख हो जाएगी।”

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