हैदराबाद, 6 जुलाई (आईएएनएस)। यहां सरकार द्वारा संचालित आंखों के अस्पताल में सर्जरी के दौरान इस्तेमाल किए गए एक दूषित मिश्रण के चलते सात लोगों की आंखों की रोशनी जाने का खतरा पैदा हो गया है।
सरोजनी देवी नेत्र अस्पताल में पिछले सप्ताह 13 लोगों के मोतियाबिंद की सर्जरी हुई थी। सर्जरी के बाद उनकी आंखों में दिक्कत पैदा हो गई। लेकिन चिकित्सकों को विश्वास है कि उन सभी की आंखों की रोशनी वापस लाई जा सकती है।
इस घटना से लोगों में भय है। अस्पताल के अधिकारियों से मिश्रण की सभी बोतलें जब्त कर ली गई हैं और एहतियात के रूप में सर्जरी बंद कर दी गई है।
अस्पताल के उपाधीक्षक राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जांच में खुलासा हुआ है कि 30 जून को इस्तेमाल किया गया मिश्रण दूषित था।
उन्होंने कहा, “मिश्रण की जांच में उसमें क्लेबसिएला पाया गया। यह एक बहुत ही कुख्यात जीव है, जो दो दवाओं को छोड़कर बाकी सभी का प्रतिरोधी है। हमने सभी मरीजों को दो दवाएं दे दी हैं।”
उन्होंने दावा किया कि पांच-छह मरीजों में सुधार दिख रहा है और उनकी आंखों की रोशनी निश्चित रूप से वापस लौट आएगी। शेष मामलों में डॉक्टर बार-बार इंजेक्शन दे रहे हैं और परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।
गुप्ता ने कहा कि केराटोप्लास्टी (कार्निया प्रत्यारोपण के जरिए सात में से दो लोगों की दृष्टि वापस आ सकती है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल को एक सरकारी दवाई की दुकान से मिश्रण (घोल) मिला। दवा निरीक्षकों ने पहले ही परीक्षण के लिए बोतलों को सील कर दिया है।
मेहंदीपट्टनम में सरोजनी देवी नेत्र अस्पताल यहां सबसे बड़ा सरकारी नेत्र अस्पताल है। यहां रोजाना गरीब और निम्न मध्य वर्ग के परिवारों से लगभग 40-50 लोग इलाज के लिए आते हैं।
dharmpath.com dharmpath