हैबिटेट फिल्मोत्सव में ‘लेखक का सिनेमा’ पर चर्चा

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। इंडिया हैबिटेट सेंटर में चल रहे हैबिटेट फिल्मोत्सव में लेखक, कवि और विश्व सिनेमा के जानकार कुंवर नारायण की किताब ‘लेखक का सिनेमा’ पर बातचीत हुई।

इस मौके पर कला और फिल्म समीक्षक विनोद भारद्वाज, कवि गीत चतुर्वेदी लेखक रविकांत एवं फिल्म आलोचक मिहिर पंड्या मौजूद थे। यह किताब राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुई है।

इस किताब में यूरोपीयन फिल्मों और फिल्मकारों पर कुछ जरूरी लेखों को शामिल किया गया है।

किताब के अनुक्रम को देखकर लगता है, जैसे लेखक का प्रेम पूर्वी यूरोपीय फिल्मकारों के प्रति अधिक हो। किताब के संपादक गीत चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने यही सवाल कुंवर नारायण से किया था, जिसके जवाब में कुंवर नारायण ने कहा, “हमारी संस्कृति उनकी संस्कृति के बहुत नजदीक है। जब हम उनकी फिल्में देख रहे होते हैं, तो ऐसा लगता है मानो अपने ही किसी हिस्से को देख रहे हों।”

फिल्म समीक्षक मिहिर पंड्या ने बताया कि इस किताब में के लेखों को पढ़कर अहसास होता है कि इन फिल्मों के माध्यम से एक जीवित इतिहास आगे बढ़ रहा है। ये लेख उस समय के दौर को साकार करके आपको उन हालात से रूबरू कराते हैं।

वरिष्ठ लेखक रविकांत ने बताया, “कुंवर नारायण बतौर कवि इन फिल्मों को देख रहे थे। उन्होंने शुरुआती फिल्मों पर साहित्य के जबरदस्त प्रभाव की भी चर्चा की।”

कुंवर नारायण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कवि हैं, वह विश्व सिनेमा के गहरे जानकारों में हैं। उन्होंने आधी सदी तक सिनेमा पर गंभीर, विवेचनापूर्ण लेखन किया हैं, व्याख्यान दिए हैं। ‘लेखक का सिनेमा’ उन्हीं में से कुछ प्रमुख लेखों, टिप्पणियों, व्याख्यानों और संस्मरणों से बनी पुस्तक है।

इसमें कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सवों की विशेष रिपार्टे हैं, जो लेखकीय ²ष्टिकोण से लिखी गई हैं और बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस किताब में वे कला, जीवन, समाज और सिनेमा इन सबके बीच के संबंधों को परिभाषित, विश्लेषित करते हुए चलते हैं।

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