1.12 अरब आबादी आधार से जुड़ी, शेष को जोड़ने की तैयारी

देश की 1.12 अरब की आबादी यानी देश की 88.2 फीसदी आबादी शुरू से विवादित राष्ट्रीय पहचान कार्यक्रम आधार कार्ड से जुड़ चुकी है।

देश की 1.12 अरब की आबादी यानी देश की 88.2 फीसदी आबादी शुरू से विवादित राष्ट्रीय पहचान कार्यक्रम आधार कार्ड से जुड़ चुकी है।

छह महीने पहले चुपचाप बिना किसी हो-हल्ले के बनाए गए एक कानून का इंडियास्पेंड ने विश्लेषण किया है कि सरकार इस कानून के जरिए कैसे शेष आबादी को आधार से जोड़ने की तैयारी कर रही है।

मंत्रिमंडल सचिवालय ने बीते वर्ष दो नवंबर को एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें आधार अधिनियम-2016 की दो धाराओं का इस्तेमाल कर सरकारी योजनाओं, रियायतों एवं रियायती सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया गया।

यह सब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2015 में दिए गए उस आदेश के बावजूद किया गया, जिसमें आधार को स्वैच्छिक बनाए जाने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं ने भी निजता और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे लोगों की निजी सूचनाओं का दुरुपयोग हो सकता है और पहले से वंचित तबके के ऐसे लोग, जिनके पास आधार कार्ड नहीं है, इन योजनाओं का लाभ नहीं ले सकेंगे।

हाल ही में केंद्र सरकार ने आधार को 530 कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया है तथा आयकर रिटर्न दाखिल करने, विद्यालय से डिग्री लेने और ड्राइविंग लाइसेंस लेने जैसे कई कार्यो में भी इसे शामिल किया गया है।

केंद्र सरकार ने नवंबर में जारी सर्कुलर में आधार अधिनियम की धारा-7 को ‘पूर्ववर्ती शर्त’ कहकर परिभाषित किया है, जिससे केंद्र सरकार को यह अधिकार मिल जाता है कि वह देश की समेकित निधी से लाभ लेने वालों, रियायत हासिल करने वालों या सेवा लेने वालों को आधार कार्ड पेश करने के लिए कहे।

नवंबर के सर्कुलर में सभी सचिवालयों को निर्देश जारी किया गया कि वे सभी मंत्रालयों से अविलंब ऐसी योजनाओं की पहचान करने के लिए पूछें, जिनसे आधार को प्राथमिक पहचान पत्र के रूप में जोड़ा जा सकता है। इसके लिए मंत्रालयों/विभागों या अन्य एजेंसियों से जरूरी पड़ने पर अपने-अपने नियमों में संशोधन करने, तथा अपने नियमों के मुताबिक, सर्कुलर/आदेश या दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा गया।

यह सर्वोच्च अदालत द्वारा 27 मार्च, 2017 को दिए गए आदेश का विरोधाभासी है, जिसमें अदालत ने कहा है कि सरकार किसी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए किसी से आधार कार्ड के लिए पंजीकरण कराने के लिए कह तो सकती है, लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए इसे अनिवार्य नहीं बना सकती।

उधर आधार नंबर जारी करने वाली संस्था ‘यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (यूआईडीएआई) का दावा है कि आधार पहचान-पत्र हासिल करने का स्वैच्छिक विकल्प है।

आधार पहचान पत्र का यह कहकर भी विरोध होता रहा है कि इससे न सिर्फ निजी जानकारियों के सार्वजनिक होने का खतरा है, बल्कि इसमें पहले से मौजूद अन्य पहचान-पत्रों से इतर व्यक्ति के धर्म, जाति, पंथ, भाषा, आया या चिकित्सकीय जैसी अन्य जानकारियां भी नहीं होतीं।

सरकार की डाइरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, देश के कुल 72 मंत्रालयों द्वारा चलाई जा रहीं 1,200 योजनाओं में से 63 मंत्रालयों की 530 जन कल्याण योजनाओं को आधार से जोड़ने की तैयारी कर ली गई है।

सरकारी योजनाओं के तहत दी जाने वाली रियायतों को सीधे नागरिकों के बैंक खातों में भेजने के उद्देश्य से इस मिशन की शुरुआत की गई थी। फरवरी, 2017 तक देश की 33.5 करोड़ की आबादी डीबीटी से लाभान्वित हुई और इसकी आधी आबादी यानी 16.8 करोड़ लोगों को उनकी रियायतें अपने सीधे अपने बैंक खातों में मिलने लगी।

हालांकि आधार से जुड़ा होने के बावजूद 30 फीसदी लोगों को अभी भी रियायतें नहीं मिल पा रही हैं।

आयकर दाखिल करने और जन कल्याणकारी योजनाओं के अलावा दूरसंचार विभाग मोबाइल फोन कनेक्शन के लिए, यूजीसी विद्यार्थियों को डिग्री लेने के लिए, सड़क परिवहन मंत्रालय नए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और पुराने लाइसेंसों के नवीनीकरण के लिए आधार को अनिवार्य करने जा रहे हैं।

तमाम विवादों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2015 में दिए गए अदेश के उल्लंघन को देखते हुए लोकसभा में 40 संशोधनों के साथ वित्त विधेयक पेश किया गया। इन संशोधनों में आधार को बैंक खातों और पैन कार्ड के लिए अनिवार्य किया जाना शामिल है। इसमें एक जुलाई की अंतिम समयसीमा भी रखी गई है, जिसके बाद आधार कार्ड से न जोड़े गए पैन कार्ड अवैध करार दे दिए जाएंगे।

एक तरफ तो सरकार कह रही है कि जिनके पास आधार नहीं है, उन्हें जन कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन न हो इसके लिए वह तमाम कानूनों में लगातार संशोधन कर आधार को अनिवार्य करती जा रही है।

(आंकड़ा आधारित, गैर लाभकारी, लोकहित पत्रकारिता मंच, इंडियास्पेंड के साथ एक व्यवस्था के तहत। ये इंडियास्पेंड के निजी विचार हैं)

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