नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को देशभर में फैली 101 नई एकीकृत कोल्ड चेन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं फलों और सब्जियां, डेयरी, मछली, मांस, समुद्री उत्पाद, मुर्गी उत्पाद, खाने के लिए तैयार/पकाने के लिए तैयार खाद्य पदार्थो के लिए हैं।
मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, नई कोल्ड चेन अवसंरचना में शीत भंडारण और प्रसंस्करण दोनों ही सुविधाएं शामिल हैं। मंत्रालय ने मई, 2015 में 30 कोल्ड चेन परियोजनाओं को मंजूरी दी थी।
बयान के अनुसार, भारत विश्व में सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक और फलों-सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके बावजूद यहां केवल 2.2 प्रतिशत फलों और सब्जियों का प्रसंस्करण किया जाता है। भारत में प्रत्येक खाद्य उत्पादन केंद्र पर सस्ते शीत भंडार और शीत श्रृंखलाओं की आवश्यकता है।
बयान में कहा गया है कि मौजूदा शीत भंडार सुविधा कुछ राज्यों में ही केंद्रित है और मोटे तौर पर 80 से 90 प्रतिशत शीत भंडारों का आलू भंडारण के लिए उपयोग किया जाता है। भारत को इस बारे में लंबा रास्ता तय करना है। खाद्य प्रसंसकरण मंत्रालय देश में राष्ट्रीय कोल्ड चेन ग्रिड का निर्माण कर रहा है, ताकि सभी खाद्य उत्पादक केन्द्रों को शीत भंडारण और प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ा जा सके।
बयान के अनुसार, कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन अवसंरचना योजना में उद्यमियों को 10 करोड़ रुपये तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इन नई एकीकृत कोल्ड चेन परियोजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा सृजन के लिए 3,100 करोड़ रुपये के कुल निवेश की जरूरत पड़ेगी। इन परियोजनाओं के लिए कुल अनुमानित ग्रांड-इन-एड 838 करोड़ रुपये होगी।
बयान के अनुसार, इन 101 नई कोल्ड चेन परियोजना से 2.76 लाख मीट्रिक टन कोल्ड स्टोरेज/नियंत्रित वायुमंडल/फ्रोजन भंडारों की अतिरिक्त क्षमता, 115 मीट्रिक टन प्रति घंटे की व्यक्तिगत त्वरित फ्रीजिंग (आईक्यूएफ) क्षमता, 56 लाख लीटर प्रति दिन दूध प्रसंस्करण की क्षमता, 210 मीट्रिक टन प्रति बैच ब्लास्ट फ्रीजिंग और 629 रेफ्रिजेरेटेड/इंसुलेटेड वाहनों की क्षमता उपलब्ध होगी।
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