1940 के दशक में शुरू हुई थी ग्लोबल वार्मिग

सिडनी, 24 सितंबर (आईएएनएस)। ग्लोबल वार्मिग यानी जलवायु पर्वितन आज के समय में गंभीर चिंता का विषय बना चुका है, लेकिन एक नए अध्ययन से पता चला है कि इसकी शुरुआत के स्पष्ट संकेत 1940 के दशक में दक्षिण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देने लगे थे।

पत्रिका ‘एन्वायरमेंटल रिसर्च लेटर्स’ में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि औसत तापमान और अत्यधिक तापमान में पहले बदलाव उष्ण कटिबंधीय इलाकों में दिखाई दिए, क्योंकि इन क्षेत्रों में तापमान की सीमा श्रेणी में काफी कम अंतर था। इसका अर्थ यह था कि ग्लोबल वॉर्मिग के कारण तापमान रिकॉर्ड में थोड़ा अंतर भी आसानी से देखा जा सकता था।

उष्ण कटिबंध में औसत तापमान में बदलाव इसका पहला संकेत था। बाद के वर्षो में अत्यधिक तापमान में बदलाव ने ग्लोबल वॉर्मिग के संकेत दिए।

ऑस्ट्रिेलियाई शोध समीति के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट सिस्टम साइंस के मुख्य अध्ययनकर्ता एंड्रयू किंग के मुताबिक, “हमारा अध्ययन बताता है कि उष्ण कटिबंध में 1960 से ग्लोबल वॉर्मिग को स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता था, लेकिन ऑस्ट्रलिया, दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में इसके संकेत 1940 में भी दिखाई दे रहे थे।”

दोनों ध्रुवों के नजदीक तापमान रिकॉर्ड में बदलाव बाद में दिखाई दिया, लेकिन वर्ष 1980-2000 तक विश्व के अधिकांश हिस्सों में किए गए तापमान रिकॉर्ड में ग्लोबल वार्मिग का असर स्पष्ट देखा जा सकता था।

इस स्पष्ट ग्लोबल वॉर्मिग के संकेतों के कुछ अपवाद भी थे। अमेरिकी महाद्वीप खासतौर पर पूर्वी घाटों और मध्य अमेरिका तक के क्षेत्रों में इसके संकेत स्पष्ट दिखने शेष हैं।

अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि अगले दशक में यहां भी इसके संकेत दिखाई देने लगेंगे।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493