नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (जेएनपीटी) में उपलब्ध लॉजिस्टिक्स डाटा बैंक (एलडीबी) सेवा को अब गुजरात के अदाणी बंदरगाहों और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एपीईएसईजेड) के मुंद्रा और हजीरा कंटेनर टर्मिनलों में भी शुरू करने के लिए समझौता किया गया है, जिसके तहत भारत के लगभग 70 प्रतिशत कंटेनरों को एक सिंगल विंडो ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम पर लाया जा सकेगा।
डीएमआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डाटा सर्विसेज लिमिटेड (डीएलडीएस) द्वारा संचालित एलडीबी, भारत के पश्चिमी गलियारे में आरएफआईडी तकनीक का उपयोग कर निर्यात-आयात कंटेनरों की वास्तविक समय पर ट्रैकिंग करने वाली प्रणाली है। बंदरगाहों से लेकर रेल या सड़क के माध्यम से इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) और कंटेनर फेट्र स्टेशन (सीएफएसएस) तक के पूरे रास्ते में एलडीबी के द्वारा आरएफआईडी टैग वाले कंटेनरों के स्थान का पता लगाया जा सकता है।
डीएलडीएस और एपीएसईजेड के बीच मंगलवार को किए गए समझौते के तहत, एक मई से मुंद्रा और हजीरा में कंटेनर टर्मिनलों में एलडीबी सेवा शुरू की जाएगी। यह 1.2 करोड़ टीईयू के देशभर के सालाना कंटेनर ट्रैफिक के 70 प्रतिशत (84 लाख टीईयू के बराबर) हिस्से को प्रभावी रूप से एलडीबी ट्रैकिंग सिस्टम के तहत ले आएगा।
भारत के सबसे बड़े बंदरगाह जेएनपीटी की 45 लाख टीईयू की क्षमता में मुंद्रा और हजीरा कंटेनर टर्मिनल में यह सेवा शुरू होने से अन्य 39 लाख टीईयू की क्षमता भी जुड़ जाएगी।
इससे न केवल जहाज से माल भेजने वालों और उपयोगकर्ताओं को वास्तविक समय में अपने कार्गो के ठिकानों पर नजर रख सकेंगे, बल्कि रसद संस्थाओं को अपने कार्यो को सुगम बनाने में भी मदद मिलेगी।
डीएमआईसीडीसी के सीईओ और प्रबंध निदेशक अल्केश शर्मा ने कहा, “एलडीबी सेवाओं के प्रति एपीएसईजी ने जो विश्वास दिखाया है, वह जुलाई, 2016 में जेएनपीटी से शुरू हुई इस परियोजना की सफलता का प्रमाण है।” विश्व बैंक की हाल की रसद प्रदर्शन सूचकांक 2016 में भारत 54वें स्थान से 35वें स्थान पर पहुंच गया है।”
उन्होंने कहा, “डीएमआईसीडीसी की रसद डाटा बैंक परियोजना देश में रसद आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की दिशा में प्रमुख कदम है। लॉजिस्टिक्स डाटा बैंक का उद्देश्य कंटेनर मूवमेंट को ट्रैक किए जाने और आपूर्ति श्रृंखला में इसकी ²श्यता के रास्ते में एक बड़ा बदलाव लाना है।”
डीएलडीएस का लक्ष्य निकट भविष्य में पश्चिमी कॉरिडोर के साथ-साथ दक्षिणी गलियारे में अन्य कंटेनर हैंडलिंग बंदरगाहों तक विस्तार करना है ताकि पूरे देश में परियोजना की पहुंच और प्रभावशीलता को अधिकतम किया जा सके।
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