विजयवाड़ा, 31 जुलाई (आईएएनएस)। विशेष दर्जे को आंध्र प्रदेश के लिए जीवन और मरण का प्रश्न बताते हुए तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने रविवार को केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से विरोध करने का फैसला किया ताकि वह (केंद्र) इस मामले में अपनी प्रतिबद्धता पूरी करे।
केंद्र सरकार का रुख है कि राज्य को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता है। इससे नाखुश भाजपानीत सरकार के घटक दल तेदेपा ने फैसला किया कि उसके सांसद सोमवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
राज्य को विशेष दर्जा दिलाने के लिए पार्टी के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।
तेदेपा के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया जानने के बाद पार्टी अपनी कार्ययोजना तैयार करेगी।
नायडू ने कहा कि वह भी मोदी से मुलाकात करना चाहेंगे।
पार्टी के सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बैठक के बाद तेदेपा प्रमुख यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
नायडू ने कहा कि संसद में दिए गए वित्त मंत्री अरुण जेटली के बयान स्वीकार्य नहीं हैं। विशेष दर्जे का संबंध राज्य के पांच करोड़ लोगों के भविष्य से है।
जेटली ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा था कि आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा नहीं दिया जाएगा, लेकिन आर्थिक रूप से स्थिर होने तक केंद्र सरकार राज्य का हाथ थामे रहेगी।
नायडू ने यह दोहराया कि केंद्र सरकार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम में जाहिर की गई प्रतिबद्धताएंपूरी करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह दो घंटे का समय देने के लिए मोदी से निवेदन कर रहे हैं ताकि वह इन दो वर्षो में राज्य के साथ हुई नाइंसाफी, पुनर्गठन अधिनियम में जाहिर की गई प्रतिबद्धताओं के बारे में उन्हें बता सकें और विशेष दर्जा एवं अन्य मुद्दों पर चर्चा कर सकें।
बताया जाता है कि तीन घंटे तक चली बैठक में सदन में जेटली के बयान देने के दौरान चुप रहने के लिए नायडू ने पार्टी के सांसदों की खिंचाई भी की।
केंद्रीय मंत्री अशोक गजपति राजू और वाई.एस. चौधरी ने नायडू से कहा कि वे केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देने को तैयार हैं, क्योंकि राज्य के हित उनके लिए सर्वोपरि हैं।
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