नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने के मामले में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। तृणमूल कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने यह बात कही है।
नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने के मामले में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। तृणमूल कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने यह बात कही है।
आईएएनएस से एक साक्षात्कार में राय ने कहा, “कर्ज के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल जैसे राज्य सरकारों के खिलाफ काम करने की बात आती है तो भाजपा और कांग्रेस में कोई फर्क नहीं है। यह दुखद है कि केंद्र सरकार महाजन की तरह व्यवहार कर रही है।”
उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर आंकड़ों की बाजीगरी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास के सुहावने आंकड़े से करोड़ों भारतीयों पर कोई अंतर नहीं आया है।
राय ने कहा, “इन आंकड़ों का कोई अर्थ नहीं है। इस तरह के आंकड़े जनता में आत्मविश्वास नहीं पैदा कर सकते।”
उन्होंने कहा, “जनता की आम समृद्धि या नौकरी के पर्याप्त अवसरों का इससे कोई संबंध नहीं है। यदि आपके पास ऐसी विकास दर है जो देश की वास्तविकता को नहीं दर्शाती तो इसका कोई मतलब नहीं है। सरकार कुछ और नहीं सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी में लिप्त है।”
भारत ने वर्ष 2015-16 में 7.6 फीसदी की विकास दर दर्ज की है। अधिकारियों का कहना है कि अगले दो वित्तीय वर्षो 2016-17 और 2017-18 में इससे अधिक विकास दर हासिल हो सकती है।
इन अधिकारियों के साथ-साथ वित्त मंत्रालय का कहना है कि सुधारों, कृषि नीति, सरकारी निवेश और सेवा क्षेत्र के मुद्दों का समाधान कर लिया गया तो दोहरे अंक की विकास दर हासिल करना संभव है। अच्छे मानसून से भी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
तृणमूल के सांसद ने कहा कि बैकों की बढ़ती गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए), बढ़ती मुद्रास्फीति और नौकरी का अभाव संकेत देता है चीजें बिल्कुल चमकदार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं और यह पूरे देश के आर्थिक परिदृश्य के लिए अच्छा नहीं है।
राय ने इस परिप्रेक्ष्य में कहा, “हमारी नेता ममता बनर्जी ने कहा है कि कमजोर राज्य मजबूत भारत नहीं सुनिश्चित कर सकते।”
राय ने कहा, “लेकिन, यह एक सच्चाई है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों में तब कोई फर्क नहीं रह जाता जब वे राज्यों के साथ व्यवहार करते हैं, खासकर ऐसे राज्यों के साथ जिनमें क्षेत्रीय दलों का शासन है।” उन्होंने कहा कि राज्यों की मर्यादा बनाए रखने के लिए राज्यों को, विशेषकर क्षेत्रीय दलों को मिलकर काम करने की जरूरत है।
राय ने कहा, “कर्ज का संकट तृणमूल कांग्रेस की सरकार को पश्चिम बंगाल की वाम दलों की सरकार से विरासत में मिला है।”
उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 से ही पश्चिम बंगाल सरकार केंद्र की मदद चाहती रही है। कांग्रेस ने कुछ नहीं किया और अब भाजपा भी उसी राह पर है। बंगाल सरकार कोई खरात नहीं मांग रही है। राज्य सरकार ने कर्ज वसूली पर तीन साल की रोक का आग्रह किया है। वर्ष 2016-17 का बंगाल का बजट 53 हजार करोड़ है लेकिन हम लोगों को 60 हजार करोड़ कर्ज का भुगतान करना है।
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